RANCHI : दशहरा पर्व भारत की समृद्ध परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा हुआ है. विजयादशमी के दिन जहां एक ओर रावण दहन कर असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष परंपराएं भी निभाई जाती हैं. इन्हीं में से एक है नीलकंठ पक्षी के दर्शन.

क्या है मान्यता
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, नीलकंठ (Indian Roller) भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि इसका दर्शन अशुभता को दूर कर जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाता है. विजयादशमी के दिन नीलकंठ देखने की परंपरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शुभारंभ और मंगलकारी कार्यों का संकेत माना जाता है. इसके साथ ही कुछ लोग यह भी मानते हैं कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन नीलकंठ पक्षी के दिखने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है.
भगवान राम को भी नीलकंठ का हुआ था दर्शन
कहा जाता है कि जब भगवान राम लंका विजय के लिए जा रहे थे, तब मार्ग में उन्हें नीलकंठ पक्षी का दर्शन हुआ था. इसे शुभ संकेत मानते हुए उन्होंने युद्ध में विजय प्राप्त की। तभी से दशहरे पर नीलकंठ देखने की परंपरा जुड़ी हुई है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सुबह-सुबह घर से निकलकर इस पक्षी को देखने की कोशिश करते हैं.
नीलकंठ पक्षी अपने नीले, हरे और भूरे रंग के पंखों के कारण आकर्षक लगता है और इसे भारतीय संस्कृति में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. यह पक्षी खेत-खलिहानों, पेड़ों और खुले स्थानों पर आसानी से दिखाई देता है. विजयादशमी के दिन लोग मानते हैं कि नीलकंठ का दर्शन पूरे साल के लिए शुभ फलदायी होता है.
निष्कर्ष
दशहरे की परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमारे लोकजीवन और आस्था से गहराई से जुड़ी हैं. नीलकंठ पक्षी का दर्शन इसी आस्था का हिस्सा है, जो यह संदेश देता है कि प्रकृति और संस्कृति का संगम ही वास्तविक शुभता का प्रतीक है.
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