चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के जोनल कमेटी सदस्य और 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली सालुका कायम ने आखिरकार मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर लिया। उसके साथ संगठन की दो महिला सदस्य पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी ने भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने तीनों के सरेंडर की पुष्टि की है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सारंडा और कोल्हान के जंगलों में लगातार चल रहे संयुक्त अभियान ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। लगातार दबाव, सुरक्षित ठिकानों की कमी और संगठन के कमजोर होते ढांचे के कारण कई उग्रवादी अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का विकल्प चुन रहे हैं। इसी परिस्थिति में सालुका ने भी आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
माओवादी संगठन का अहम चेहरा था सालुका
सालुका कायम कई नामों से सक्रिय रहा और संगठन में उसकी पहचान एक भरोसेमंद कमांडर के रूप में थी। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का करीबी माना जाता था। कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में दस्ते का संचालन, नए सदस्यों की भर्ती, लेवी वसूली और संगठन के लिए सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था जैसी जिम्मेदारियां उसके पास थीं। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से ही वह लगातार दबाव में था।
96 मामलों में था नाम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सालुका पर झारखंड के विभिन्न थानों में 96 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, हत्या, रंगदारी वसूली, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कई नक्सली घटनाओं का आरोप है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच पश्चिमी सिंहभूम में हुई कई बड़ी नक्सली वारदातों में उसका नाम सामने आया था। मनोहरपुर क्षेत्र में मार्च 2026 में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में भी उसकी सक्रिय भूमिका बताई गई थी।
ग्रामीणों की हत्या और लेवी वसूली के आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक सालुका पर पुलिस मुखबिरी के संदेह में ग्रामीणों की हत्या, रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने, निर्माण कार्यों में लगी मशीनों में आग लगाने और ठेकेदारों से लेवी वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। उसके खिलाफ यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं।
दो महिला नक्सलियों ने भी छोड़ा संगठन
सालुका के साथ आत्मसमर्पण करने वाली कोदोमुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी पर झारखंड सरकार ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह माओवादी दस्ते की सक्रिय सदस्य थी और उसके खिलाफ टोंटो थाना में कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
वहीं, गोईलकेरा क्षेत्र की रहने वाली पिंकी के खिलाफ भी आठ नक्सल मामलों में प्राथमिकी दर्ज है। वर्ष 2019 में वन विभाग के विश्रामगृह को विस्फोट से उड़ाने की घटना में भी उसका नाम सामने आया था।
कोल्हान में माओवादियों को बड़ा झटका
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सालुका कायम जैसे वरिष्ठ कमांडर का आत्मसमर्पण कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। हाल के महीनों में लगातार गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की घटनाओं से यह संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिमी सिंहभूम और सारंडा में माओवादी संगठन का प्रभाव तेजी से कमजोर हो रहा है।







