नो इंट्री विवाद: सरकार-प्रशासन की संवादहीनता से समाधान नहीं – रमेश बालमुचू

नो एंट्री समस्या

चाईबासा: चाईबासा में नो इंट्री समस्या को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रमेश बालमुचू ने सरकार और प्रशासन पर संवादहीनता एवं संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

बिना वार्ता के वापस लौटे आंदोलनकारी

 

 

 

 

नो इंट्री आंदोलन समिति के बैनर तले 26 अप्रैल से शुरू हुई न्याय पदयात्रा पांच दिनों तक चलकर रांची पहुंची। आंदोलनकारियों का उद्देश्य हेमंत सोरेन से मिलकर अपनी मांग रखना था।

लेकिन मुख्यमंत्री आवास के समीप पहुंचने के बावजूद किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं हो सकी, जिसके चलते सभी ग्रामीण और आंदोलनकारी निराश होकर वापस लौट गए।

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नो एंट्री समस्या

 “समस्या बड़ी नहीं, इच्छाशक्ति की कमी” – बालमुचू

रमेश बालमुचू ने कहा कि चाईबासा बाईपास MDR-177 पर सुबह से रात तक भारी वाहनों की नो एंट्री लागू करना कोई जटिल मुद्दा नहीं है।
उनका आरोप है कि:

  • सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी है
  • जनसमस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा
  • लंबी पदयात्रा के बावजूद कोई अधिकारी सामने नहीं आया

गांधीवादी तरीके से हुआ आंदोलन

महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलते हुए यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया।

  • 26 अप्रैल को चाईबासा से शुरुआत
  • 1 मई को रांची में समापन
  • पूरे मार्ग में कोई अप्रिय घटना नहीं
  • नो एंट्री समस्या

 प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

 

 

 

 

 

बालमुचू ने आरोप लगाया कि:

  • रांची जाने वाले रास्तों पर सुबह 3 बजे से पुलिस तैनात की गई
  • बसों और वाहनों को रोका गया
  • कई लोगों को हिरासत में लिया गया
  • वाहनों को जब्त किया गया

इसके बावजूद 500 से अधिक लोग किसी तरह रांची पहुंचकर आंदोलन में शामिल हुए

पहले से दी गई थी सूचना

आंदोलन समिति के अनुसार:

  • 9 अप्रैल: उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को सूचना
  • 10 अप्रैल: उपायुक्त रांची एवं खूंटी को पत्र
  • 10 अप्रैल: मुख्यमंत्री सचिवालय को आवेदन
  • 30 अप्रैल: रांची प्रशासन द्वारा मार्ग संबंधी जानकारी मांगी गई

इसके बावजूद आंदोलनकारियों का दावा है कि सरकार की ओर से संवाद की पहल नहीं हुई

आगे की रणनीति जल्द

रमेश बालमुचू ने स्पष्ट किया कि अब:

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