चाईबासा: कोल्हान क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) अनुरंजन किस्पोट्टा ने शनिवार को चाईबासा समाहरणालय परिसर स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय सभागार में पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले में दर्ज विभिन्न संवेदनशील मामलों की जांच और पुलिस कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियार, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु के अलावा दोनों जिलों के डीएसपी, थाना प्रभारी और अन्य वरीय पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
NDPS, IT और SC/ST एक्ट के मामलों की समीक्षा
डीआईजी ने दोनों जिलों में NDPS एक्ट, IT एक्ट और SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों की बारी-बारी से समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों में अब तक हुई कार्रवाई, अनुसंधान की प्रगति और केस डायरी की स्थिति की जानकारी अधिकारियों से ली।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन मामलों का अनुसंधान लंबित है, उनका निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। पुलिस अधिकारियों को जांच में अनावश्यक देरी से बचने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए गंभीरता से काम करने को कहा गया।
तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
डीआईजी ने अनुसंधान की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए आधुनिक तकनीकी संसाधनों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और अनुसंधान अधिकारियों को केस डायरी नियमित रूप से अपडेट रखने का निर्देश दिया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अनुसंधान में लापरवाही या निर्धारित जिम्मेदारियों के निर्वहन में कोताही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अपराध नियंत्रण के लिए बेहतर समन्वय
कोल्हान क्षेत्र के दोनों जिलों की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी ने पुलिस अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया। अपराध नियंत्रण के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपसी सहयोग को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
थाना प्रभारियों को आम लोगों से बेहतर तालमेल स्थापित करने और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए त्वरित समाधान की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया। डीआईजी ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद से अपराध नियंत्रण के साथ-साथ लोगों का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा।
मुख्य निर्देश: लंबित कांडों का समयबद्ध निष्पादन, केस डायरी को अपडेट रखना, तकनीकी संसाधनों का उपयोग, पुलिस अधिकारियों में समन्वय और जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान।






