सरायकेला। जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। व्यवहार न्यायालय सरायकेला के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए तीन अभियुक्तों को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने तिरुलडीह थाना क्षेत्र के सपड़ा गांव निवासी रवि सिंह मुंडा, जीतू सिंह मुंडा और गुरचरण सिंह मुंडा उर्फ गोराई को पॉक्सो एक्ट
की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए यह फैसला दिया।
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जुर्माना न देने पर भुगतनी होगी अतिरिक्त सजा
न्यायालय ने तीनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने की स्थिति में दोषियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) के तहत भी तीनों को तीन-तीन वर्ष के कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस धारा के तहत जुर्माना न चुकाने पर दो माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
स्कूल से घर लौटते समय की गई थी दरिंदगी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह वीभत्स घटना 19 अगस्त 2024 की है। कक्षा नौ में पढ़ने वाली 15 वर्षीय छात्रा स्कूल की छुट्टी के बाद पैदल अपने घर लौट रही थी। सुनसान रास्ते का फायदा उठाकर तीनों आरोपियों ने उसे जबरन रोका और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने तिरुलडीह थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को जघन्य अपराध का दोषी पाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नाबालिगों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और दोषियों को किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं माना जा सकता।
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