गुवा (संवाददाता): सेवा और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने समाज में ‘इंसानियत’ शब्द को जीवंत कर दिया है। गुवा थाना क्षेत्र के नुईया गांव में बेसहारा हुए तीन मासूम भाई-बहनों की मदद के लिए समाजसेवी सलीम कुरैशी आगे आए हैं। उन्होंने न केवल इन बच्चों को राशन और कपड़े उपलब्ध कराए, बल्कि इनके भविष्य और भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उठाकर समाज के सामने एक प्रेरणा पेश की है।
विपदाओं का पहाड़: पिता की मृत्यु और मां का साथ छूटा
नुईया गांव निवासी स्वर्गीय दूनी चाम्पिया के परिवार पर पिछले एक साल से दुखों का पहाड़ टूट रहा था।
* करीब एक वर्ष पूर्व पिता की बीमारी से मौत के बाद परिवार आर्थिक तंगी से घिर गया।
* इसके बाद बच्चों की मां, नंदी चाम्पिया ने दूसरी शादी कर ली और अपने तीन बच्चों— गीता (10 वर्ष), जानों (8 वर्ष) और वीरसिंह (6 वर्ष) को उनकी वृद्ध नानी के भरोसे छोड़कर चली गई।
बुजुर्ग नानी खुद की जीविका चलाने में असमर्थ थीं, ऐसे में इन तीनों मासूमों के सामने दो वक्त की रोटी और अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया था।
देवदूत बनकर आए सलीम कुरैशी
जब इस दुखद स्थिति की जानकारी गुवा बाजार के प्रमुख समाजसेवी सलीम कुरैशी को मिली, तो उन्होंने बिना देरी किए बच्चों से मुलाकात की। बच्चों की दयनीय स्थिति देख उन्होंने तत्काल राहत पहुंचाई:
* तात्कालिक सहायता: बच्चों को पर्याप्त राशन, नए कपड़े और दैनिक जरूरत की सामग्रियां प्रदान की गईं।
* दीर्घकालिक जिम्मेदारी: सलीम कुरैशी ने घोषणा की है कि इन तीनों बच्चों के खाने-पीने और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी वे स्वयं वहन करेंगे।
“समाज में कोई भी बच्चा अपनों की कमी के कारण भूखा न सोए, यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। इन बच्चों का सहारा बनना मेरे लिए सेवा का अवसर है।”
— सलीम कुरैशी, समाजसेवी

क्षेत्र में सराहना की लहर
सलीम कुरैशी के इस नेक कार्य की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब सलीम कुरैशी जैसे लोग ही समाज में उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। उनके इस कदम ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानवता किसी धर्म या बंधन की मोहताज नहीं होती।
संपादकीय टिप्पणी: यह खबर हमें याद दिलाती है कि हमारे आस-पास ऐसे कई जरूरतमंद हैं जिन्हें केवल थोड़े से सहयोग की तलाश है। सलीम कुरैशी का यह कदम समाज के अन्य सामर्थ्यवान लोगों के लिए एक सीख है।
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