Adityapur ESIC dialysis stopped: आदित्यपुर ईएसआई अस्पताल में डायलिसिस मरीजों की जान खतरे में

 

 

 

 

Adityapur: आदित्यपुर स्थित कोल्हान के एकमात्र ईएसआईसी अस्पताल में बुधवार 6 मार्च से किडनी मरीज के लिए का डायलिसिस का इलाज बंद होने जा रहा है. जिससे सैकड़ों मरीजों के जान पर आफत बन सकती है.

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दरअसल आदित्यपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में 5 वर्ष पूर्व नेफ्रो प्लस नामक कंपनी के साथ टाइपअप कर मरीज का डायलिसिस इलाज शुरू किया गया था,यहां तकरीबन 70 से भी अधिक मरीज सप्ताह में तीन से चार बार डायलिसिस का इलाज करते हैं, लेकिन टाइपअप खत्म होने के बाद नेफ्रो प्लस द्वारा मंगलवार को अचानक नोटिस चस्पा

कर बुधवार 6 मार्च से डायलिसिस इलाज बंद करने की घोषणा की गई है, जिससे मरीजों के जान पर संकट बन आयी है, वहीं परिजनों का बुरा हाल है.

 

 

 

डायलिसिस के मरीजो ने इस संकट से उबारने के लिए आदित्यपुर नगर निगम के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह से मुलाकात कर इस समस्या का हल निकाले जाने की मांग की है, डायलिसिस मरीजों के परिजनों का कहना है की प्रतिमाह उनके निजी कंपनी के वेतन में से ईएसआईसी इलाज के नाम पर कटौती की जाती है, लेकिन उन्हें अचानक से किडनी मरीज को जान बचाने वाले इस इलाज को बंद किए जाने से उनके समक्ष अब जान का खतरा बन गया है. परिजनों ने बताया कि सेकेंडरी टाइअप के तहत शहर के निजी अस्पतालों के साथ करार खत्म कर दिया है, ऐसे में 10 से 15 हज़ार रुपए प्रतिमाह कमाने वाले इन मजदूरों को बाहर निजी अस्पताल में डायलिसिस इलाज के लिए प्रतिमा 26 हज़ार रुपए खर्च करने पड़ेंगे, जो संभव नहीं है. पुरेंद्र नारायण सिंह ने केंद्रीय श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय एवं निजी सहायक को पूरे मामले से अवगत कराया है ,जिस पर समाधान निकालने संबंधित आश्वासन दिया गया है, वही दूसरी तरफ केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत योजना के तहत भी किडनी मरीज का डायलिसिस इलाज शहर के अधिकांश अस्पतालों में बंद है, ऐसे में मरीज के समक्ष करो या मरो की स्थिति उत्पन्न है।

 

 

समस्या का निकाला जा रहा हाल अस्पताल:अधीक्षक

 

 

6 मार्च से डायलिसिस इलाज बंद होने की मुद्दे पर ईएसआई अस्पताल के अधीक्षक एमपी मिंज ने बताया है कि फिलहाल टाइअप के तहत पूर्व के अस्पतालों से बात कर तत्काल सुविधा शुरू करने की पहल की जा रही है, जबकि मरीजों के परिजनों का मानना है कि ऐसी कोई व्यवस्था अब तक शुरू नहीं है, जो आने वाले दिनों में जिंदगी से लड़ रहे मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनेगा.

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