चाईबासा सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही! ‘संक्रमित खून’ ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, पति-पत्नी समेत मासूम बच्चा हुआ HIV पॉजिटिव

सदर अस्पताल चाईबासा, HIV

Chaibasa (चाईबासा): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गहरा दाग लगा है। चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से कथित तौर पर संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्य—पति, पत्नी और उनका बड़ा बेटा—एचआईवी (HIV) की चपेट में आ गए हैं। इस हृदयविदारक घटना ने जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा और रक्त जांच प्रणाली की पोल खोल दी है।

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सदर अस्पताल चाईबासा, HIV

2023 की एक गलती, 2026 में बना काल

​मामले की जड़ें जनवरी 2023 से जुड़ी हैं। पीड़ित महिला की पहली डिलीवरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उसे सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया था। परिवार का आरोप है कि उसी समय लापरवाही बरती गई और बिना सही जांच के संक्रमित खून चढ़ा दिया गया।

दूसरी गर्भावस्था में हुआ खौफनाक खुलासा

​यह खौफनाक सच्चाई तब सामने आई जब महिला जून 2025 में दूसरी बार गर्भवती हुई। प्रसव पूर्व नियमित जांच के दौरान महिला की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद जब पूरे परिवार की स्क्रीनिंग कराई गई, तो पैरों तले जमीन खिसक गई:

  • पति भी संक्रमित: पत्नी के संपर्क में आने के कारण पति की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई।
  • मासूम बच्चा भी चपेट में: 2 जनवरी 2026 को दूसरे बच्चे के जन्म के बाद जब बड़ा बेटा बीमार पड़ा, तो जांच में वह भी एचआईवी संक्रमित पाया गया।

पुनरावृत्ति: पहले भी 5 बच्चे हो चुके हैं शिकार

​सदर अस्पताल के ब्लड बैंक का विवादों से पुराना नाता रहा है। याद रहे कि अक्टूबर 2025 में भी इसी ब्लड बैंक से रक्त लेने वाले 5 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे एचआईवी संक्रमित पाए गए थे। बार-बार हो रही इन घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि अस्पताल प्रबंधन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया है।

क्या कहती हैं सिविल सर्जन?

​इस संवेदनशील मामले पर पश्चिमी सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने कहा कि विभाग पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया:

​”पीड़ित परिवार को मंगलवार को अस्पताल बुलाया गया है। हम मेडिकल रिकॉर्ड, ब्लड डोनर की हिस्ट्री और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करेंगे। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण का वास्तविक स्रोत क्या है।”

 

उठते गंभीर सवाल: कौन है जिम्मेदार?

​इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवा पर भरोसे को शून्य कर दिया है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई तीखे सवाल खड़े किए हैं:

  1. ​क्या ब्लड बैंक में डोनर के खून की NAAT (Nucleic Acid Test) या अनिवार्य मानक जांच नहीं की जा रही है?
  2. ​अक्टूबर 2025 की घटना के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई और व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए?
  3. ​एक मासूम बच्चे और बेगुनाह परिवार की इस दुर्दशा का हर्जाना कौन भरेगा?

फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। यह मामला न केवल लापरवाही का है, बल्कि एक पूरे परिवार के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाला ‘मेडिकल क्राइम’ नजर आ रहा है।

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