Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में मंगलवार देर रात एक विशाल दंतैल हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। हाथी के हमले से आधा दर्जन से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कई ग्रामीण घायल हो गए। लगातार हो रही घटनाओं से इलाके में दहशत का माहौल है। वहीं, वन विभाग की कथित उदासीनता से नाराज चाईबासा के नीमडीह गांव के ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।


मझगांव : घर ढहने से मलबे में दबे बच्चे, दंपत्ति घायल
मझगांव क्षेत्र में वन विभाग के लगभग 100 कर्मियों का कैंप हटते ही हाथियों ने फिर से हमला बोल दिया। सोनापोसी पंचायत के बास्की गांव में दंतैल हाथी ने रामसिंह चातार और काया चातार के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद हाथी चत्रीसाई गांव की ओर बढ़ गया।

चत्रीसाई गांव में सुखलाल पिगुंवा का घर ढहने से पांच छोटे बच्चे मलबे में दब गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर हाथी वहां से भागा, जिसके बाद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और मझगांव रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया।
इसी दौरान बच्चों के चाचा मुंगड़ी पिगुंवा और उनकी पत्नी संध्या को हाथी ने सूंड से पटक दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद हाथी ने पाण्डुकी टोला में भी धावा बोला, जहां दीवार गिरने से बुजुर्ग ऊचबा गोप घायल हो गए।
हाथी ने प्रदीप हेंब्रम और हरिश विरुवा के घरों को भी तोड़ दिया तथा वहां रखा अनाज चट कर गया। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं।

नीमडीह में मुआवजे को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
दूसरी ओर, टोंटो प्रखंड के नीमडीह गांव में हाथियों द्वारा किए जा रहे नुकसान को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बुधवार को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जान मिरन मुंडा और जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा राहत के नाम पर दिया जा रहा 20 किलो चावल ऊंट के मुंह में जीरा समान है। बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि 23 जनवरी को वन विभाग की लापरवाही के विरोध में चाईबासा स्थित डीएफओ कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया जाएगा।

मुआवजा नीति पर उठे सवाल, स्थायी समाधान की मांग
मजदूर नेता जान मिरन मुंडा ने झारखंड सरकार की मुआवजा नीति की तुलना पड़ोसी राज्य ओडिशा से करते हुए कहा कि वहां हाथी हमले में मौत पर 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है, जबकि झारखंड में यह राशि बेहद कम है। उन्होंने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से ग्रामीणों की जान लगातार खतरे में पड़ रही है।
ग्रामीणों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों को तत्काल उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। साथ ही पाण्डुकी सहित अन्य प्रभावित गांवों में हाई-मास्ट और स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं तथा हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए वन विभाग की टीम की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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