(Saraikela) सरायकेला: झारखंड में लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे नगर निकाय चुनावों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग द्वारा अक्तूबर 2024 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की तैयारियों ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यदि इसी सूची से मतदान कराया गया तो राज्य के लगभग 5 लाख नए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाएंगे।
Jharkhand Mayor Seat Reservation : झारखंड नगर निगम चुनाव – मेयर आरक्षण पर सस्पेंस बरकरार

हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल
इस विसंगति के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के नेता रमेश हांसदा ने कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है। हांसदा का तर्क है कि चुनाव में देरी होने के कारण लाखों युवाओं ने मतदान की आयु सीमा पार कर ली है और हजारों लोगों ने अपना पता बदला है। ऐसे में पुरानी सूची का उपयोग करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
प्रशासनिक अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ता रमेश हांसदा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में रजिस्ट्रार, मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य निर्वाचन आयोग को औपचारिक पत्र भेजे थे। हालांकि, लंबे समय तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या जवाब न मिलने के बाद उन्होंने न्यायपालिका की शरण ली। उनका कहना है कि निकाय चुनाव पहले ही कई सालों की देरी से हो रहे हैं, ऐसे में वोटरों को उनके संवैधानिक अधिकार से दूर रखना उचित नहीं है।
आदित्यपुर नगर निगम का उदाहरण
रमेश हांसदा ने स्थानीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केवल आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में ही बीते एक साल में लगभग 20 हजार नए मतदाता बढ़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि स्वयं हांसदा ने भी हाल ही में अपना नाम आदित्यपुर निगम क्षेत्र में शिफ्ट कराया है। उनका कहना है कि यदि पुरानी सूची पर मतदान हुआ, तो वे स्वयं मतदाता होने के बावजूद मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।








