चाईबासा। आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष ईपील सामड ने सामाजिक संगठनों के कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी को लेकर जिला प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रख रहे लोगों को बलपूर्वक गिरफ्तार कर प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में एकतरफा कार्रवाई की।
जारी प्रेस बयान में ईपील सामड ने कहा कि कार्यक्रम से पहले महासभा की ओर से प्रशासन को लिखित रूप से मध्यस्थता और वार्ता का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद बातचीत का रास्ता अपनाने के बजाय कार्रवाई की गई, जिससे कोल्हान के आदिवासियों की आवाज दबाने का प्रयास हुआ।
उन्होंने कहा कि कोल्हान के हो आदिवासियों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का समर्थन कर अबुआ सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद पश्चिमी सिंहभूम जिला जेएमएम समिति ने कोल्हान के स्थानीय वीर योद्धाओं की उपेक्षा करते हुए दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना के मुद्दे पर जिस प्रकार का रुख अपनाया, उससे पार्टी की प्राथमिकताएं स्पष्ट हो गई हैं।
ईपील सामड ने कहा कि यदि संबंधित नेताओं में सामाजिक संवेदनशीलता होती तो वे इस विषय पर आपत्ति जता रहे सामाजिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित करते। उन्होंने आरोप लगाया कि संवाद की बजाय टकराव का रास्ता चुना गया।
महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी हो समाज युवा महासभा हमेशा हो समाज की सामाजिक पहचान, अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए कार्य करती रही है। इसके बावजूद विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा महासभा पर राजनीतिक दलों का समर्थक या दलाल होने जैसे आरोप लगाए जाते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि महासभा भविष्य में भी संविधान और कानून के दायरे में रहकर हो समाज की अस्मिता, अधिकारों और जनभावनाओं की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
> नोट: यह समाचार आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष ईपील सामड द्वारा जारी प्रेस बयान पर आधारित है।







