चाईबासा: गांधी मैदान में लगने वाले मीना बाजार में वाहन पार्किंग के नाम पर कथित वसूली इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा पार्किंग की बंदोबस्ती नहीं किए जाने की स्पष्ट सूचना जारी करने के बावजूद कुछ लोगों द्वारा वाहन चालकों से पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। मामले को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली और पार्किंग व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
नगर परिषद प्रशासक ने जारी की थी आम सूचना
नगर परिषद प्रशासक की ओर से जारी आम सूचना में कहा गया है कि गांधी मैदान में आयोजित मीना बाजार के वाहन पार्किंग की बंदोबस्ती नगर परिषद द्वारा नहीं की गई है। बंदोबस्ती नहीं होने के कारण किसी भी तरह की वाहन पार्किंग से संबंधित वसूली को अवैध बताया गया है। इसके बावजूद पार्किंग शुल्क लिए जाने की शिकायत सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पार्किंग के नाम पर साधारण कागज की छपवाई गई पर्चियां दी जा रही थीं। पर्चियों पर ‘ मीना बाजार’ या ‘गांधी मैदान पार्किंग’ जैसे शब्द लिखी गई है। लोगों का दावा है कि इन पर्चियों पर नगर परिषद चाईबासा की सरकारी मुहर, लोगो, विज्ञापन संख्या अथवा संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।
लोगों के मुताबिक दोपहिया वाहनों से करीब 20 रुपये, चारपहिया वाहनों से 30 से 50 रुपये और ठेला लगाने वालों से 100 रुपये तक लिए जाने की शिकायत है। हालांकि इन शुल्कों की आधिकारिकता की पुष्टि नगर परिषद से नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया पर मामले को उठाए जाने के बाद पिछले दो-तीन दिनों से कथित तौर पर बिना रसीद के ही पैसे लिए जा रहे हैं। शुल्क देने से इनकार करने पर बहस, धमकी अथवा मेला परिसर से बाहर करने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले को लेकर नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद की अधिकांश निविदाएं ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से होती हैं। ऐसे में मीना बाजार की पार्किंग व्यवस्था के लिए यदि कोई बंदोबस्ती की गई है तो उसकी प्रक्रिया, निविदा सूचना, राशि और ठेकेदार से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
भुक्तभोगी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि पार्किंग का कोई टेंडर नहीं हुआ है तो वसूली किस आधार पर की जा रही है। वहीं यदि बंदोबस्ती हुई है तो उसकी आम सूचना कब और कहां प्रकाशित की गई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि कहीं पार्किंग की बंदोबस्ती टेबल टेंडर के माध्यम से तो नहीं की गई।
हर साल कम राशि में मीना बाजार के टेंडर पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि गांधी मैदान में लगने वाले मीना बाजार की बंदोबस्ती हर वर्ष किस प्रक्रिया के तहत की जाती है और पिछले वर्षों की तुलना में इसकी राशि कितनी रही है। लोगों ने मांग की है कि पिछले वर्षों के टेंडर की राशि, वर्तमान वर्ष की बंदोबस्ती राशि, निविदा प्रक्रिया और संबंधित शर्तों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
मेला उद्घाटन कार्यक्रम में दिव्यांग और गरीब बुजुर्गों को आगे रखकर सामाजिक सरोकार का संदेश देने के बीच पार्किंग शुल्क को लेकर उठ रहे आरोपों ने स्वयंभू सामाजिक कार्यकर्ता सह आयोजकों और नगर परिषद की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर नगर परिषद प्रशासन की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर है।









