New Delhi (नई दिल्ली) : आगामी 2027 की जनगणना में आदिवासी समुदाय की स्वतंत्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान दर्ज कराने के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर नई दिल्ली स्थित झांसी रोड के डॉ. आंबेडकर भवन में दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने भाग लिया।
राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की पहल पर आयोजित इस संवाद में आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान को जनगणना में स्वतंत्र रूप से दर्ज कराने, अलग धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने और इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों के बीच व्यापक सहमति कायम करने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
धर्म कोड के नाम और स्वरूप में एकरूपता पर जोर
दो दिवसीय बैठक के दौरान संगठन के विस्तार, आदिवासी धर्म कोड के नाम एवं स्वरूप में एकरूपता लाने तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों और प्रयासों को एक साझा मंच पर लाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही आदिवासी समाज के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने और विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा पर भी विचार किया गया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना महज आबादी की गणना की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को आधिकारिक रूप से दर्ज करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। ऐसे में आदिवासी समुदाय की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं, प्रकृति आधारित आस्था, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को स्वतंत्र धार्मिक पहचान के रूप में दर्ज किए जाने की आवश्यकता है।
सरकार के समक्ष तथ्यात्मक तरीके से मांग रखने की तैयारी
संवाद के दौरान भारत सरकार और संबंधित जनगणना प्राधिकरण के समक्ष आदिवासी धर्म कोड की मांग को तथ्यात्मक, लोकतांत्रिक और संगठित तरीके से रखने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए विभिन्न आदिवासी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, साझा रणनीति तैयार करने, दस्तावेजी प्रमाण जुटाने, जनसमर्थन हासिल करने और चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा बनाने पर सुझाव लिए गए।
प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि धर्म कोड के मुद्दे को लेकर देशभर के आदिवासी संगठनों के साथ-साथ बुद्धिजीवियों, युवा एवं महिला संगठनों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद होना चाहिए। इससे एक साझा मांग और एकरूप रणनीति के साथ सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सकेगा।

विभिन्न राज्यों में जनजागरूकता अभियान का प्रस्ताव
राष्ट्रीय संवाद के दौरान जनजागरूकता अभियान, धर्म कोड के नाम एवं स्वरूप में एकरूपता, विभिन्न राज्यों में सामाजिक संवाद और सरकार के समक्ष मांग प्रस्तुत करने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को आगामी जनगणना में उचित स्थान दिलाने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई।
बैठक में विभिन्न राज्यों का दौरा कर आदिवासी समाज के बीच संवाद एवं जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव भी रखा गया। आयोजकों का मानना है कि यह पहल 2027 की जनगणना में आदिवासी समुदाय की स्वतंत्र धार्मिक पहचान दर्ज कराने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर संगठित प्रयास को गति दे सकती है।









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