देशी कट्टा, जिंदा कारतूस और PLFI की चंदा रसीद बरामदगी मामले में चक्रधरपुर न्यायालय का फैसला
Chaibasa (चाईबासा): पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन PLFI से जुड़े मामले में न्यायालय ने आरोपी रघु पूर्ति उर्फ पाते को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला 15 सितंबर 2026 को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, चक्रधरपुर के न्यायालय में सुनाया गया।
Chaibasa: अफीम तस्करी मामले में दोषी को 15 साल की सजा, 2.30 लाख रुपये जुर्माना
मामला बंदगांव थाना कांड संख्या 08/2025 से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ अवैध हथियार रखने, PLFI संगठन से जुड़े होने, संगठन के लिए चंदा वसूली से संबंधित रसीद रखने तथा चोरी की मोटरसाइकिल के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था।
पुलिस को मिली थी PLFI सदस्य के आने की सूचना
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को पुलिस को सूचना मिली थी कि PLFI उग्रवादी संगठन का एक सक्रिय सदस्य बंदगांव की ओर आ रहा है। सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों को जानकारी दी और निर्देश के अनुसार छापेमारी टीम गठित की गई। टीम में पुलिस के साथ सशस्त्र बल को भी शामिल किया गया।
छापेमारी टीम जब मेरेमगुटू गांव के पास पहुंची तो पुलिस ने मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों को अपनी ओर आते देखा। पुलिस को देखते ही दोनों मोटरसाइकिल घुमाकर भागने लगे। इसी दौरान मोटरसाइकिल गिर गई और दोनों जंगल की तरफ भागने लगे। सशस्त्र बल के सहयोग से पुलिस ने एक युवक को पकड़ लिया, जबकि दूसरा व्यक्ति जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गया।
तलाशी में हथियार और चंदा रसीद मिलने का दावा
पकड़े गए युवक ने पुलिस पूछताछ में अपना नाम रघु पूर्ति उर्फ पाते, निवासी ग्राम गुपुंडई, थाना बंदगांव, बताया। पुलिस द्वारा की गई तलाशी के दौरान उसके कमर से एक देशी कट्टा और दो जिंदा गोलियां बरामद होने की बात कही गई है। इसके अलावा पैंट की पीछे वाली जेब से PLFI की तीन चंदा रसीद तथा पैंट की दूसरी जेब से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।
पुलिस ने मौके से Honda CD 110 Deluxe मोटरसाइकिल भी जब्त की। पूछताछ में मोटरसाइकिल से संबंधित कोई कागजात नहीं मिलने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।
अनुसंधान के बाद न्यायालय में दाखिल किया गया आरोप पत्र
मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अनुसंधान के दौरान साक्ष्य जुटाने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया गया। इसी मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद चक्रधरपुर न्यायालय ने आरोपी को धारा 25(1-B)(a) Arms Act के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।







