सोनारी के साटिन पिंक सैलून पर 13 लोगों से 2.51 करोड़ की ठगी का आरोप, अंडरवर्ल्ड के नाम पर धमकाने का भी दावा

सोनारी के साटिन पिंक सैलून से जुड़ी कथित करोड़ों की ठगी मामले की सांकेतिक तस्वीर

Jamshedpur (जमशेदपुर) : सोनारी स्थित साटिन पिंक सैलून से जुड़े लोगों पर करीब 2.51 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सैलून की संचालिका, उनके पति और बेटे ने फ्रेंडली लोन, कारोबार में साझेदारी और निवेश पर आकर्षक मुनाफे का भरोसा देकर शहर के करीब 13 लोगों से रकम ली। तय समय पर भुगतान नहीं होने के बाद जब रकम वापस मांगी गई तो कथित तौर पर टालमटोल की गई और कुछ पीड़ितों को अंडरवर्ल्ड के नाम पर धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।

मामले में पीड़ितों की ओर से बिष्टुपुर थाने में शिकायत दिए जाने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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निवेश और पार्टनरशिप के नाम पर रकम लेने का आरोप

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने परिचित कारोबारियों को अपने सैलून कारोबार से जोड़ने और उसमें निवेश करने का प्रस्ताव दिया था। कुछ लोगों को फ्रेंडली लोन देने के बदले निर्धारित अवधि में रकम लौटाने का भरोसा दिया गया, जबकि अन्य से पार्टनरशिप अथवा निवेश के नाम पर पैसे लिए गए।

शुरुआत में भरोसा कायम रखने के लिए भुगतान और मुनाफे का आश्वासन दिया गया। लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें अलग-अलग कारण बताकर टालने का आरोप है।

13 लोगों से लाखों रुपये लेने की शिकायत

शिकायत में कई कारोबारियों की रकम का भी उल्लेख किया गया है। आरोप के मुताबिक नवीन अग्रवाल से 36.50 लाख रुपये और मोनक तेवरीवाल से भी 36.50 लाख रुपये लिए गए। वहीं राजेंद्र खेमका और पारस अग्रवाल से 25-25 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।

इसके अलावा मनीष राखेजा से 21.40 लाख रुपये और शुभंकर चटर्जी से 17.20 लाख रुपये लेने की बात शिकायत में कही गई है। अन्य पीड़ितों से भी लाखों रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुल रकम करीब 2.51 करोड़ रुपये है।

व्हाट्सऐप चैट और लेनदेन की जांच

मामले की जांच के दौरान पुलिस को पीड़ितों की ओर से व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग, बैंक ट्रांजैक्शन और भुगतान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस इन साक्ष्यों के आधार पर रकम के लेनदेन और आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है।

मामले के जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर परेश रजवार बताए गए हैं। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों के साथ-साथ उन खातों की भी जांच कर सकती है, जिनमें कथित तौर पर ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित रूप से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। इसके साथ ही शिकायत में लगाए गए अंडरवर्ल्ड के नाम पर धमकी देने के आरोप और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले को वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच के दायरे में लिया है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

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