Adityapur (आदित्यपुर) : आदित्यपुर के एस टाइप चौक (विशाल मेगा मार्ट के समीप) स्थित जमीन विवाद अब पूरी तरह गरमा गया है। इस मामले में झारखंड क्षत्रीय संघ के केंद्रीय अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह के सुर में सुर मिलाते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय सदस्य और पूर्व सरायकेला विधानसभा प्रत्याशी गणेश महाली भी खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं।

Saraikela : जमीन विवाद के चलते सौतेले भाइयों ने पत्थर से कुचलकर की थी भाई की हत्या, दो गिरफ्तार
राजनीतिक रंजिश का मामला
शंभू नाथ सिंह ने भी विधायक चंपाई सोरेन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में विधायक के मनपसंद उम्मीदवार की मदद न करने के कारण वे राजनीतिक रंजिश के तहत लगातार झूठे आरोप मढ़ रहे हैं। सिंह ने साफ किया कि उन्होंने अपनी जमीन पर सिर्फ मिट्टी का समतलीकरण कराया है और मलबा हटवाया है, जबकि वहां से दुकानें हटाने की कार्रवाई पूरी तरह से प्रशासन द्वारा की गई है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद में अब झामुमो नेता गणेश महाली के कूदने से क्षेत्र की सियासी हलचल काफी तेज हो गई है।
विधायक पर जनता को गुमराह करने का आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान गणेश महाली ने स्थानीय भाजपा विधायक चंपई सोरेन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर जनता को भ्रमित और गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। गणेश महाली ने कहा कि एस टाइप की वह विवादित जमीन (लगभग 3,600 वर्ग फीट) कानूनी तौर पर सुकांत बारीक के नाम पर आवंटित है, जिसे साल 2011 में एक नीलामी (ऑक्शन) के माध्यम से खरीदा गया था। महाली ने कहा कि इसके बावजूद स्थानीय विधायक द्वारा लोगों को इस जमीन को लेकर भ्रमित किया जा रहा है और गलत तरीके से कब्जा दिलाने की कोशिश की जा रही है, जो सरासर गलत है।
महाली ने दिया अपने चुनावी कार्यालय का हवाला
शंभू नाथ सिंह के दावों को मजबूती देते हुए गणेश महाली ने कहा कि जब वे साल 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर सरायकेला विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने इसी जमीन पर अपना चुनावी कार्यालय खोला था। महाली के अनुसार, उन्होंने सुकांत बारीक से बाकायदा दस्तावेज (कागजात) लेकर अनुमति ली थी और उन सारे दस्तावेजों को चुनाव आयोग और निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर कार्यालय खोलने की आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त की थी।
2011 में ऑक्शन से खरीदी थी जमीन: सुकांत बारी
विवादित जमीन के मूल आवंटी सुकांत बारी ने स्पष्ट किया कि साल 2011 में उन्होंने रांची हाउसिंग बोर्ड के ऑक्शन (नीलामी) के जरिए इस जमीन को वैध तरीके से खरीदा था। यह मामला पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनके पक्ष में हाईकोर्ट का आदेश भी आ चुका है। वर्तमान में वे शंभू नाथ सिंह के पुत्र विकास सिंह के साथ इस जमीन के ज्वाइंट वेंचर में पार्टनरशिप में है।








