आदित्यपुर: लोकतंत्र में मतदान जनता की सबसे बड़ी ताकत और संविधान की रीढ़ है, लेकिन जब इसी बुनियादी व्यवस्था पर सवाल उठने लगें तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। यह बात झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव अजय सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर तीखा हमला बोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे और निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की। अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस कोई निराधार आरोप नहीं लगा रही है, बल्कि यह बातें खुद चुनाव आयोग की संवैधानिक संस्था के अंदर से ही सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि आयोग के ही साथी अधिकारियों ने अनियमितताओं और वोट चोरी को लेकर गंभीर बातें कही हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रणाली में हेरफेर कर सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र में किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर ऐसे सवाल उठते हैं, तो उन्हें पद छोड़ना चाहिए और जांच का सामना करना चाहिए, लेकिन भाजपा उनके बचाव में खड़ी नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2022 में कानून बनाकर अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने की रणनीति अपनाई गई। कांग्रेस इस पूरे मुद्दे को लेकर सीधे जनता के बीच जाएगी और जनमत से हुए कथित धोखे को उजागर करेगी।
झारखंड में SIR पर निष्पक्षता की मांग
झारखंड में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर भी अजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हर 5 से 7 वर्षों में मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि सुधार के नाम पर किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं कटना चाहिए। एसआईआर की आड़ में किसी खास वर्ग या पार्टी विशेष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगी। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने की मांग की।







