Chaibasa (चाईबासा) | पश्चिमी सिंहभूम जिले में DMFT (District Mineral Foundation Trust) फंड की योजनाओं को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के जरिए जिले के बाहर के ठेकेदारों की घुसपैठ और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ने जिले की सियासत गरमा दी है। ताजा मामला टोंटो प्रखंड की एक सड़क परियोजना का है, जहाँ ‘फर्जी शिलान्यास’ और वन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

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पलामू की कंपनी को मिला ठेका, ‘कागज’ का लगा शिलापट्ट
टोंटो प्रखंड के रेंगडासाई पंचायत में करीब 2.23 करोड़ रुपये की लागत से पीसीसी पथ का निर्माण किया जा रहा है। जिला परिषद सदस्य राज तुबीड ने खुलासा किया है कि यह महत्वपूर्ण योजना पलामू की कंपनी ‘गुप्ता इंटरप्राइजेज’ को 7 प्रतिशत कम दर पर आवंटित की गई है।
हैरानी की बात यह है कि 2 करोड़ से अधिक की इस योजना के लिए मार्बल के स्थायी शिलापट्ट की जगह कागज/पम्पलेट से बना अस्थायी बोर्ड लगा दिया गया है, जिसे विभाग और ठेकेदार की ‘सांठ-गांठ’ का नमूना माना जा रहा है।

सांसद-मंत्री के नाम पर ‘फर्जी शिलान्यास’ का दावा?
जिप सदस्य राज तुबीड ने कार्यकारी एजेंसी NREP और संवेदक पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि:
- शिलापट्ट पर 7 जनवरी को मंत्री दीपक बिरुवा और सांसद जोबा मांझी द्वारा शिलान्यास दर्शाया गया है।
- आरोप है कि उस दिन न तो मंत्री वहां पहुंचे थे और न ही सांसद।
- बिना जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और जानकारी के उनके नाम का इस्तेमाल करना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।

पर्यावरण को खतरा: बिना अनुमति के कट रहे जंगल
सड़क निर्माण की आड़ में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का मामला भी सामने आया है। योजना स्थल चाईबासा वन प्रमंडल के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
- वन विभाग से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिए बिना ही जेसीबी मशीनों से भारी मात्रा में हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है।
- सड़क निर्माण के लिए पहाड़ी पत्थरों का अवैध खनन और संग्रह किया जा रहा है।

स्थानीय संवेदकों के वजूद पर संकट
इस विवाद ने एक और अहम बहस छेड़ दी है। जिले के बाहर के ठेकेदारों द्वारा ‘लो-रेट’ (बेहद कम दर) पर टेंडर डालने से स्थानीय संवेदकों को काम नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि बाहर के ठेकेदार मुनाफा कमाने के चक्कर में कार्य की गुणवत्ता से समझौता करते हैं और उन्हें स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी नहीं होती।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
राज तुबीड ने दो टूक शब्दों में कहा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और विकास के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।








