चाईबासा। दुर्घटना में क्षतिग्रस्त वाहन का बीमा दावा पर्याप्त आधार और ठोस साक्ष्य के बिना खारिज करना Go Digit General Insurance Ltd. को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी माना है। आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को ₹2,34,698 की बीमा राशि, मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न के लिए ₹25,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹15,000 भुगतान करने का आदेश दिया है।
आयोग ने बीमा राशि पर शिकायत दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। वहीं निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर ब्याज दर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी।
दो ट्रकों के बीच फंसी कार, टक्कर से बचने के प्रयास में हादसा
मामला चाईबासा निवासी मुकेश कुमार मोदी के वाहन संख्या JH05 BZ 1808 से संबंधित है। वाहन का Own Damage बीमा Go Digit General Insurance से कराया गया था। इसकी बीमा अवधि 2 फरवरी 2025 से 1 फरवरी 2026 तक थी। वाहन का Insured Declared Value (IDV) ₹2,34,698 निर्धारित था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक 9 मार्च 2025 की रात वह चाईबासा से क्योंझर की ओर जा रहे थे। रिमुली, क्योंझर के पास दो तेज रफ्तार ट्रक एक-दूसरे को ओवरटेक करने के दौरान उनकी कार के दोनों तरफ आ गए। अचानक सामने आई स्थिति में टक्कर से बचने के लिए उन्होंने वाहन को दाईं ओर मोड़ दिया। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े एक अन्य ट्रक से कार जा टकराई।
हादसे में वाहन के अगले हिस्से के साथ बाएं हिस्से को भी काफी नुकसान पहुंचा।
दावा किया खारिज, कंपनी ने दुर्घटना से नुकसान का संबंध नकारा
दुर्घटना की जानकारी बीमा कंपनी को देने के बाद शिकायतकर्ता ने बीमा दावा प्रस्तुत किया। हालांकि कंपनी की ओर से दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया। बाद में कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि वाहन को हुआ नुकसान शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए दुर्घटना के तरीके से मेल नहीं खाता।
शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर फोन, मैसेज और ई-मेल के माध्यम से कंपनी से संपर्क कर मामले का समाधान कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
नोटिस के बाद भी आयोग में नहीं पहुंची बीमा कंपनी
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने Go Digit General Insurance को नोटिस जारी किया। नोटिस प्राप्त होने के बावजूद कंपनी की ओर से आयोग में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। कंपनी ने न तो लिखित जवाब दाखिल किया और न ही अपने दावे को प्रमाणित करने के लिए कोई सर्वे रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट, तकनीकी रिपोर्ट अथवा अन्य ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया।
इसके बाद 18 अप्रैल 2026 को आयोग ने मामले को बीमा कंपनी के विरुद्ध एकतरफा सुनवाई के लिए तय कर दिया।
‘सिर्फ शक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता’
आयोग ने अपने आदेश में माना कि केवल यह कह देना कि वाहन को हुआ नुकसान बताए गए दुर्घटना के तरीके से मेल नहीं खाता, बीमा दावा अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। बीमा कंपनी को अपने निर्णय के समर्थन में विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहिए था।
चूंकि कंपनी ने अपने आरोपों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं किए, आयोग ने बीमा दावा खारिज करने की कार्रवाई को उचित नहीं माना और इसे सेवा में कमी के दायरे में रखा।
₹40 हजार अतिरिक्त मुआवजे का आदेश
आयोग ने Go Digit General Insurance Ltd. को शिकायतकर्ता को ₹2,34,698 बीमा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न के लिए ₹25,000 और मुकदमे में हुए खर्च के लिए ₹15,000 देने का आदेश दिया गया है।
बीमा राशि पर शिकायत दायर किए जाने की तारीख से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
हालांकि शिकायतकर्ता की ओर से वाहन की पार्किंग तथा वैकल्पिक किराये के वाहन पर हुए अतिरिक्त खर्च की मांग भी रखी गई थी, लेकिन उसके पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं होने के कारण आयोग ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।
45 दिन में भुगतान का निर्देश
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश का पालन करते हुए निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। यदि इस अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
मामले में शिकायत 22 दिसंबर 2025 को दर्ज हुई थी, अंतिम सुनवाई 29 अगस्त 2026 को हुई और आयोग ने अपना फैसला 10 सितंबर 2026 को घोषित किया।






