रांची/चाईबासा | विशेष संवाददाता
झारखंड के जंगलों में नक्सलवाद का सूर्य अस्त होने के कगार पर है। सारंडा के बीहड़ों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में पुलिस ने ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। आईजी (अभियान) साकेत कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि इस मुठभेड़ में 15 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें एक करोड़ का इनामी और मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर एनाल्डा उर्फ पातीराम मांझी उर्फ अनल भी शामिल है।

7 घंटे तक गूंजी गोलियां: ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ में भीषण जंग
सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों का शीर्ष दस्ता जमा है। इसी आधार पर झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ (CRPF) की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला।
- मुठभेड़ की शुरुआत: सुबह ठीक 6:30 बजे।
- गोलाबारी की अवधि: करीब 7 घंटे तक दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई।
- नेटवर्क की बाधा: इलाका इतना दुर्गम है कि वहां नेटवर्क की भारी किल्लत है, जिसके कारण मुख्यालय तक सूचनाएं पहुंचने में काफी वक्त लगा।
1 करोड़ का इनामी अनल ढेर, उड़ीसा सरकार ने भी रखा था इनाम
मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम पातीराम मांझी उर्फ अनल का है। झारखंड सरकार ने उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, साथ ही उड़ीसा सरकार की हिट लिस्ट में भी वह टॉप पर था। अनल को कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जाता था। इसके अलावा मारे गए कई अन्य नक्सलियों पर भी लाखों के इनाम घोषित थे।
“इतिहास बनने के कगार पर नक्सली” – आईजी साकेत कुमार सिंह
मुठभेड़ की जानकारी देते हुए आईजी साकेत कुमार सिंह ने कहा कि यह नक्सलियों की कमर तोड़ने वाला प्रहार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नक्सलवाद झारखंड में इतिहास बनने के कगार पर है। सुरक्षा बलों के हौसले बुलंद हैं और ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
सर्च अभियान जारी: घेराबंदी में अभी भी कई नक्सली
आईजी ने बताया कि मुठभेड़ भले ही थम गई हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।
- इलाके की घेराबंदी: आशंका है कि कई घायल नक्सली अब भी आसपास के घने जंगलों और गुफाओं में छिपे हो सकते हैं।
- सघन तलाशी: पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें पूरे इलाके को सैनिटाइज कर रही हैं। सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है ताकि किसी भी भागते हुए नक्सली को पकड़ा जा सके।
नक्सलवाद के अंत की शुरुआत?
गृह मंत्रालय द्वारा मार्च 2026 तक की डेडलाइन से पहले यह बड़ी सफलता सुरक्षा बलों के लिए संजीवनी साबित होगी। एक साथ 15 नक्सलियों और शीर्ष कमांडर का मारा जाना माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है।
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