चाईबासा। चाईबासा में ‘नो एंट्री’ लागू करने की मांग को लेकर शुरू हुई न्याय पद यात्रा सोमवार शाम टेबो जंगल पहुंच गई। यह पद यात्रा रविवार को तांबो चौक से प्रारंभ हुई थी और समिति के संयोजक रमेश बालमुचू के नेतृत्व में जारी है। जानकारी के अनुसार, यह यात्रा 26 अप्रैल से शुरू होकर विभिन्न गांवों और जंगल क्षेत्रों से गुजरते हुए 1 मई को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। पद यात्रा में सैकड़ों ग्रामीणों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हैं।
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन: राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेज हुई मांगें
प्रशासन ने 5 घंटे तक की समझाइश, नहीं बनी सहमति
आंदोलनकारियों के चक्रधरपुर पहुंचने पर जिला प्रशासन ने रात करीब 8 बजे लाल गिरजा के समीप उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में सभी को चक्रधरपुर अनुमंडल कार्यालय ले जाया गया, जहां प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई। यह वार्ता देर रात करीब 12 बजे तक चली, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों की ओर से मांग रखी गई कि जिला प्रशासन तत्काल ‘नो एंट्री’ लागू करने का आदेश जारी करे। इसके साथ ही, दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और मुख्यमंत्री के साथ वार्ता के लिए समय निर्धारित करने की भी मांग की गई।
वार्ता में शामिल अधिकारी और प्रतिनिधि
बैठक में चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति कुमारी, अपर उपायुक्त चाईबासा, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (चक्रधरपुर व चाईबासा), विभिन्न प्रखंडों के बीडीओ सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। वहीं आंदोलनकारियों की ओर से संयोजक रमेश बालमुचू, रेयांश सामड, साधु बानरा समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए।
फिलहाल, वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और न्याय पद यात्रा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।
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