KANDRA NILACHAL POLLUTION: जहर उगलती नीलांचल कंपनी की चिमनियां, प्रधानमंत्री कृषि पुरस्कार सम्मानित प्रदूषण के प्रकोप से लाचार, कंपनी को बनाना था 33% ग्रीन कवर एरिया, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रयास नहीं ख़तरे मे ज़िन्दगी, पार्ट-3 देखें रिपोर्ट- VIDEO

SARAIKELA : जिले के कांड्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत रतनपुर स्थित नीलांचल आयरन एंड पावर लिमिटेड द्वारा प्रदूषण फैलाए जाने और जिंदगी से खिलवाड़ किए जाने की समस्या को प्रमुखता से दिखाए जाने का सिलसिला जारी है. कंपनी के भयंकर प्रदूषण का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा. कंपनी के प्रदूषण से जनजीवन, कृषि, पर्यावरण और जल, जंगल, जमीन सभी प्रभावित हो रहे हैं. बीते समय में श्री विधि से धान की खेती कर झारखंड कृषि कर्मण पुरस्कार से प्रधानमंत्री के हाथों सम्मानित होने वाले पूर्व मुखिया और किसान सोखेन हेंब्रम जिन्होंने अपना पूरा जीवन कृषि को समर्पित कर दिया है. वे ही अब कंपनी प्रदूषण की मार के चलते खेती-बड़ी से दूर होते जा रहे हैं.

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नीलांचल कंपनी द्वारा प्रदूषण फैला कर जिंदगी और पर्यावरण से खेलने के मुद्दे को प्रमुखता से दिखाए जाने का नतीजा रहा कि झारखंड कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित हुए पूर्व मुखिया सोखेन हेंब्रम ने भी प्रदूषण के चलते प्रभावित हो रहे. खेती-बड़ी की समस्या हमारे साथ साझा करते इन्होंने बताया कि नीलांचल कंपनी द्वारा हाल के दिनों में बेतरतीब और बेतहाशा प्रदूषण फैलाया जा रहा है. लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर के चलते आसपास क्षेत्र के सभी खेत -खलिहान हरियाली के बजाय काले डस्ट की चादर ओढ़े बैठे. सोखेन बताते हैं कि दो साल पूर्व इन्हें श्री विधि से धान की खेती करने के लिए झारखंड से प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए सम्मानित किया गया था, तब प्रदूषण का स्तर इतना नहीं था. लेकिन आज जिस प्रकार से कंपनी ने प्रदूषण फैला रखा है उससे अब पुरस्कार पाना तो दूर की बात सामान्य खेती-बाड़ी भी नहीं हो सकती. सोखेन बताते हैं कि सभी फसल, सब्जियां खेतों में बोये जाने के बाद पैदावार के लिए तैयार नहीं हो पा रही. फ़सल लगने से पहले ही कंपनी के प्रदूषण खेतों के साथ फ़सल को भी बर्बाद कर दे रहे हैं इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.

33% ग्रीन कवर एरिया कंपनी के पास करना था विकसित

कंपनी द्वारा एनवायरमेंट क्लीयरेंस से पूर्व प्रोजेक्ट में हरियाली स्थापित किए जाने संबंधित है दावे किए गए थे. लेकिन इसके ठीक विपरीत ग्रीन कवर एरिया को कंपनी द्वारा दरकिनार कर दिया गया है. इस संबंध में सरायकेला डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि कंपनी को आसपास के क्षेत्र में 33% ग्रीन कवर एरिया स्थापित किए जाने के उद्देश्य से पेड़ पौधे लगाए जाने हैं. कंपनी दावा तो करती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं दिख रहा. डीएफओ ने बताया कि अप्रैल महीने से पूर्व कंपनी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयास संबंधित रिपोर्ट सुपुर्द करने हैं. यही प्रक्रिया नहीं अपनाने के चलते एनजीटी ने कंपनी को का जुर्माना लगाया था.

वन विभाग से अधिक प्रदूषण नियंत्रण परिषद की जिम्मेदारी

नीलांचल कंपनी द्वारा प्रदूषण फैला कर पर्यावरण और पेड़ पौधों को नष्ट किए जाने के संबंध में जानकारी देते हुए डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि कंपनी प्रदूषण के अधिकांश मामलो में इनके पास शिकायतें आई हैं. लेकिन पर्यावरण पेड़ पौधों की रक्षा के साथ इन्हें बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण परिषद की भी होती है. डीएफओ बताते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण परिषद को ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत देखा जाना है कि चिमनीयो से निकलने वाले धुएं प्रदूषण स्तर क्या है और यह आसपास के क्षेत्रों में क्या प्रभाव डाल रही है.

एनजीटी कार्रवाई पर टिकी है नजरें

कंपनी द्वारा प्रदूषण फैलाए जाने के मुद्दे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पूर्व में किए गए शिकायत के बाद प्रदूषण संबंधित मामला एनजीटी में लंबित है. इधर कंपनी प्रबंधन को अप्रैल माह में प्रदूषण रोके जाने संबंधित योजनाओं से एनजीटी को अवगत कराना है. वही मामले पर एनजीटी के रिपोर्ट का इंतजार है. कयास लगाए जा रहे हैं कि एनजीटी द्वारा प्रदूषण फैलाए जाने के मुद्दे पर कंपनी प्रबंधन एनजीटी के कोप का भाजन बन सकती है.

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