चाईबासा (प. सिंहभूम): पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल में बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के गंभीर मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने इस मामले में आरोपी लैब तकनीशियन मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
चाईबासा ब्लड बैंक कांड: थैलेसिमिया बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त, उच्चस्तरीय जांच समिति गठित
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार यह घटना 17 अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है, जब सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों का इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान इन बच्चों को जो रक्त चढ़ाया गया, वह बाद में एचआईवी संक्रमित पाया गया। इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया था।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी क्रम में आरोपी लैब तकनीशियन मनोज कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
जांच में लापरवाही के संकेत
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि रक्त की जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। आरोप है कि बिना सही जांच के ही संक्रमित रक्त बच्चों को चढ़ा दिया गया, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया।
परिजनों में आक्रोश, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना के बाद पीड़ित बच्चों के परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि अस्पताल की लापरवाही ने मासूम बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। वहीं, इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस लापरवाही में और कौन-कौन जिम्मेदार हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
गंभीर सवाल
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों और जांच प्रक्रियाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित बच्चों को न्याय कैसे मिलता है।








