चाईबासा। कोरोना संक्रमण के दौरान इलाज पर हुए खर्च का स्वास्थ्य बीमा दावा खारिज करना बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ गया। पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी की ओर से पूरे दावे को खारिज किए जाने को अनुचित माना है। आयोग ने शिकायतकर्ता रंजिता पॉल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को बीमा राशि, मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे और मुकदमा खर्च के रूप में कुल 7.10 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह फैसला सीसी केस संख्या 08/2025 में सुनाया गया। मामले की अंतिम सुनवाई 11 जुलाई 2026 को हुई, जबकि आयोग ने 10 अगस्त 2026 को अपना फैसला घोषित किया।
चाईबासा जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही पर, विधवा को 6.50 लाख रुपये देने का आदेश
कोरोना संक्रमण के बाद कोलकाता में कराया था इलाज
मामले के अनुसार, चाईबासा निवासी रंजिता पॉल ने बजाज एलियांज की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। अप्रैल 2021 में कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई। इसके बाद 18 अप्रैल को उन्हें कोलकाता के गुड समैरिटन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 1 मई तक इलाज चला।
इसके बाद 2 मई से 5 मई तक उनका रेपोस क्लिनिक एंड रिसर्च सेंटर में इलाज कराया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार अस्पताल में इलाज, दवाओं और अन्य चिकित्सकीय खर्चों को मिलाकर कुल 6,34,530 रुपये खर्च हुए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनी ने खारिज किया था दावा
बीमा कंपनी की ओर से मामले की स्वतंत्र जांच कराई गई थी। जांच के दौरान अस्पताल के कथित असहयोग, इलाज से संबंधित कुछ बिंदुओं, डॉक्टर से मुलाकात नहीं होने, इन-हाउस फार्मेसी और कुछ बिल-पर्चियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए थे।
इन्हीं आधारों पर बीमा कंपनी ने 12 मई 2022 को बीमा दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
जांचकर्ता की रिपोर्ट को निर्णायक प्रमाण नहीं माना
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त जांचकर्ता की रिपोर्ट अकेले किसी बीमा दावे को फर्जी, कपटपूर्ण या अपात्र साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसी रिपोर्ट को मामले में उपलब्ध अन्य दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ देखा जाना जरूरी है।
आयोग ने माना कि केवल अस्पताल के जांच में सहयोग नहीं करने, डॉक्टर से मुलाकात नहीं होने या कुछ दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर पूरे बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
कंपनी ठोस चिकित्सकीय साक्ष्य पेश नहीं कर सकी
आयोग के अनुसार, बीमा कंपनी यह साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र विशेषज्ञ चिकित्सकीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी कि शिकायतकर्ता का इलाज फर्जी, अनावश्यक या कोरोना संक्रमण से संबंधित नहीं था।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से अस्पताल के बिल, भुगतान की रसीदें, मेडिकल दस्तावेज और दवाओं से संबंधित कागजात प्रस्तुत किए गए थे। आयोग ने माना कि ऐसी स्थिति में पूरे दावे को एकमुश्त खारिज करना उचित नहीं था।
आयोग ने यह भी कहा कि यदि बीमा कंपनी को किसी विशेष खर्च पर आपत्ति थी, तो उसे पूरे दावे को अस्वीकार करने के बजाय मदवार जांच करनी चाहिए थी और केवल अपात्र खर्च को ही खारिज करना चाहिए था।
45 दिन में भुगतान का आदेश
आयोग ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 6 लाख रुपये बीमा दावा राशि, 1 लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना एवं उत्पीड़न के मुआवजे और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया है।
आदेश के अनुसार भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाना है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बीमा दावा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
कैनरा बैंक के खिलाफ शिकायत खारिज
मामले में शामिल कैनरा बैंक, चाईबासा शाखा के खिलाफ आयोग को स्वतंत्र रूप से किसी सेवा-कमी का प्रमाण नहीं मिला। इसलिए बैंक के विरुद्ध की गई शिकायत को आयोग ने खारिज कर दिया।
उपभोक्ता मामलों में अहम टिप्पणी
इस फैसले में आयोग ने बीमा कंपनियों द्वारा दावों की जांच और उन्हें खारिज करने के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। आयोग का निष्कर्ष है कि केवल संदेह या अधूरी जांच के आधार पर किसी वैध बीमा दावे को पूरी तरह अस्वीकार नहीं किया जा सकता। दावा खारिज करने के लिए बीमा कंपनी को पॉलिसी की संबंधित शर्त या अपवर्जन का स्पष्ट आधार और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है।








