सरायकेला: राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान मां-बेटे की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 30 अप्रैल (गुरुवार) को हुई इस दुखद घटना के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जहां एक ओर परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने प्राकृतिक आपदा को इस स्थिति का जिम्मेदार बताया है।
”आंधी-तूफान ने बिगाड़ी व्यवस्था” – सिविल सर्जन
छुट्टी से लौटने के बाद सिविल सर्जन डॉ. सरजू प्रसाद सिंह ने घटना पर सफाई देते हुए बताया कि 30 अप्रैल को क्षेत्र में आए भारी आंधी-तूफान के कारण अस्पताल की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। उन्होंने कहा, “आंधी इतनी भीषण थी कि अस्पताल का सोलर सिस्टम भी टूट गया था। ऐसी आपातकालीन स्थिति में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराने की मजबूरी सामने आई।

DC ने गठित की जांच टीम, सोमवार से एक्शन
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरायकेला उपायुक्त ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम कल सोमवार से अस्पताल का दौरा कर मामले की विस्तृत जांच शुरू करेगी। जांच दल यह पता लगाएगा कि क्या वाकई संसाधनों का अभाव था या फिर यह सीधे तौर पर चिकित्सीय लापरवाही का मामला है।
गमगीन माहौल में अंतिम विदाई
गौरतलब है कि मृतका बिनीता बानरा, जो खुद एक स्वास्थ्य सहिया थीं, और उनके नवजात बेटे का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में बैकअप की पुख्ता व्यवस्था होती, तो आंधी-तूफान के बावजूद दो जानें बचाई जा सकती थीं।








