चाईबासा, 10 अक्टूबर 2026। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत संचालित जल जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत शनिवार को चाईबासा स्थित जिला स्तरीय जल जांच प्रयोगशाला में विद्यार्थियों के लिए एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। इस दौरान मांगीलाल रूंगटा 10+2 विद्यालय के कक्षा 11 के 20 छात्र-छात्राओं ने प्रयोगशाला का भ्रमण कर पेयजल की गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की।
पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चाईबासा के कार्यपालक अभियंता ई. विनोद कुमार के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल के महत्व, पानी की गुणवत्ता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

## विद्यार्थियों ने सीखी पानी की गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया
प्रयोगशाला भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को पानी की गुणवत्ता जांचने के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्हें पानी में टीडीएस (TDS) यानी कुल घुलित ठोस पदार्थों की मात्रा और पीएच (pH) मान की जांच के महत्व से अवगत कराया गया।
विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला में उपलब्ध जांच उपकरणों को करीब से देखा और पानी के नमूनों की जांच करने की प्रक्रिया को समझा। उन्हें यह भी बताया गया कि सुरक्षित पेयजल का उपयोग स्वास्थ्य की दृष्टि से क्यों आवश्यक है और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच से संभावित समस्याओं की पहचान करने में कैसे मदद मिल सकती है।
## जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना अभियान का उद्देश्य
विभाग के अनुसार, जल जनभागीदारी अभियान का प्रमुख उद्देश्य आम लोगों, विशेषकर युवाओं में जल संरक्षण और पेयजल की गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें अपने परिवार और समाज में स्वच्छ पानी तथा जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को इस उद्देश्य से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे जल संरक्षण और पानी की गुणवत्ता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ सकें।
## कार्यक्रम में दिखा विद्यार्थियों का उत्साह
प्रयोगशाला भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने पानी की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं में रुचि दिखाई और विभिन्न उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मियों के साथ विद्यालय के शिक्षक भी उपस्थित रहे।
इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से पानी की गुणवत्ता समझने का अवसर मिला। साथ ही, जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।








