Jamshedpur (जमशेदपुर)। भारत और अमेरिका के बीच महत्त्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की महावाणिज्य दूत ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर का दौरा किया। उनके साथ राजनीतिक एवं आर्थिक मामलों के कौंसल भी उपस्थित थे।
यह दौरा भारत और के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित महत्त्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) समझौता ज्ञापन (MoU) के अनुरूप आयोजित किया गया। यह समझौता दोनों देशों द्वारा इस रणनीतिक क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
दौरे के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और के वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के बीच विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीएसआईआर-एनएमएल तथा अमेरिकी अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच संभावित सहयोग, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं तथा तकनीकी साझेदारी के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने महत्त्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और मूल्य संवर्धन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का भी आकलन किया।
इस अवसर पर सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक ने संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि सीएसआईआर-एनएमएल देश में धातुकर्म, पदार्थ विज्ञान, खनिज प्रसंस्करण तथा रणनीतिक धातुओं के क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधान संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रस्तुति के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने प्रयोगशाला की विभिन्न अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया। टीम को महत्त्वपूर्ण खनिजों, धातुओं, उन्नत पदार्थ विज्ञान तथा संबद्ध धातुकर्म क्षेत्रों में चल रहे अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने विभिन्न परियोजनाओं और तकनीकी नवाचारों का प्रदर्शन करते हुए उनके औद्योगिक एवं रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में महावाणिज्य दूत कैथी गाइल्स-डेविस ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए महत्त्वपूर्ण खनिजों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार के लिए इन खनिजों की उपलब्धता और प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने प्राथमिक एवं द्वितीयक संसाधनों के प्रसंस्करण के क्षेत्र में सीएसआईआर-एनएमएल और अमेरिकी अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवाद तथा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के साझा हित, तकनीकी क्षमताएं तथा समान चुनौतियां इस क्षेत्र में प्रभावी और दीर्घकालिक साझेदारी की व्यापक संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं।
दौरे के अंत में दोनों पक्षों ने महत्त्वपूर्ण खनिजों और उन्नत धातुकर्म अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, ज्ञान एवं विशेषज्ञता के आदान-प्रदान तथा संयुक्त अनुसंधान पहलों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह दौरा भारत-अमेरिका वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
http://जमशेदपुर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक पर जोर








