जमशेदपुर: अरका जैन विश्वविद्यालय, झारखंड में जुलाई बैच के नवप्रवेशित पीएचडी शोधार्थियों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम ‘आरंभ 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों को पीएचडी की अकादमिक यात्रा, शोध प्रक्रिया, विश्वविद्यालय के शोध परिवेश, नियमों एवं प्रक्रियाओं तथा गुणवत्तापूर्ण शोध के मानकों से परिचित कराना रहा।
नवाचार, नैतिकता और अनुशासन पर जोर, शोधार्थियों को मिला शोध यात्रा का रोडमैप
कार्यक्रम का उद्घाटन टाटा कॉलेज, चाईबासा के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अमर सिंह की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने शोधार्थियों को शोध कार्य में निरंतरता, अनुशासन और एकाग्रता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) ईश्वरन अय्यर ने शोध में नए विचारों और नवाचार को महत्वपूर्ण बताते हुए शोधार्थियों से सहपाठियों एवं शोध पर्यवेक्षकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए अकादमिक नैतिकता के पालन पर भी विशेष जोर दिया।
प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अंगद तिवारी ने शोधार्थियों को अपने शोध पर्यवेक्षकों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने और शोध कार्य में निरंतरता रखने का संदेश दिया। वहीं, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस. एस. रज़ी ने शोधार्थियों से अपने विषय से संबंधित पुस्तकों, शोध-पत्रों और प्रतिष्ठित जर्नल्स का गहन अध्ययन करने तथा निर्धारित शोध उद्देश्यों पर केंद्रित रहने का आह्वान किया।

शोध नैतिकता और IPR की दी गई जानकारी
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान मानवीय मूल्य, आचार संहिता, शोध नैतिकता और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। शोधार्थियों को शोध के दौरान जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के महत्व से अवगत कराया गया।
इसके अलावा विश्वविद्यालय की ERP प्रणाली, पुस्तकालय सुविधाओं, डिजिटल एवं ई-रिसोर्सेज तथा आंतरिक शिकायत समिति की कार्यप्रणाली की जानकारी भी दी गई। पीएचडी कोर्सवर्क, शोध प्रक्रिया, मूल्यांकन व्यवस्था तथा विश्वविद्यालय के नियमों और प्रावधानों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव, संयुक्त कुलसचिव डॉ. जसबीर सिंह धनजल, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. अरविंद कुमार पांडेय तथा विभागीय अनुसंधान समिति (DRC) के सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान शोधार्थियों की सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया। शोधार्थियों ने विभिन्न सत्रों को उपयोगी, ज्ञानवर्धक और संवादात्मक बताते हुए कहा कि ‘आरंभ 2026’ से उन्हें पीएचडी की प्रक्रिया को समझने के साथ अपनी शोध यात्रा के लिए आवश्यक दिशा और दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिली।
कार्यक्रम का समन्वय अनुसंधान विभाग की सहायक डीन प्रो. (डॉ.) सोनिया रियात ने किया।








