
मंत्री रामदास सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम छात्र-छात्राओं के उत्साहवर्धन के लिए है. शिक्षा के बिना हम अपने समाज, राज्य या देश को आगे नहीं बढ़ा सकते. जब हमने मानव रूप में जन्म लिया है तो शिक्षित होना हमारा कर्तव्य है. पहले हमारे आदिवासी समाज में बेटियों की पढ़ाई को महत्त्व नहीं दिया जाता था लेकिन अब समय बदल रहा है, लोग जागरूक हो रहे हैं और अपने बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं.
Share करें
Whatsapp Us