चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन: हो भाषा के लिए ऐतिहासिक और गर्वपूर्ण क्षण

चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन

Chaibasa: चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन तांतनगर प्रखंड के दारा गांव निवासी एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर दिलदार पुरती द्वारा रचित पुस्तक के लोकार्पण के रूप में चाईबासा में आयोजित किया गया। मागे पर्व के पावन अवसर पर आयोजित चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

इस अवसर पर प्रख्यात हो भाषा उपन्यासकार तिलक बारी ने कहा कि साहित्य समाज की सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने बताया कि चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन केवल एक पुस्तक का लोकार्पण नहीं, बल्कि हो समाज की भाषाई अस्मिता का उत्सव है।

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चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन

वारंग चिति लिपि में रचित विशेष कृति

चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन के दौरान वक्ताओं ने वारंग चिति लिपि के संरक्षण पर जोर दिया। यह पुस्तक स्थानीय जीवन, परंपरा और सामाजिक सच्चाइयों का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है।

सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा

चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं

  • वारंग चिति लिपि में लेखन

  • सामाजिक यथार्थ का चित्रण

  • सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण

  • युवाओं के लिए प्रेरणादायक सामग्री

निष्कर्ष:
चिरगेल सनंग पुस्तक विमोचन हो समाज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। आने वाले समय में ऐसी पहलें क्षेत्रीय भाषाओं को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में सहायक होंगी।

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