जमशेदपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को झारखंड के जमशेदपुर जिले के कदमा मरीन ड्राइव स्थित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परमार्थ केंद्र न्यास द्वारा प्रस्तावित भव्य श्री जगन्नाथ मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन एवं आधारशिला रखी। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग शामिल हुए।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, टाटा स्टील के सीईओ एवं एमडी टीवी नरेंद्रन सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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“सही समय का इंतजार था”
राष्ट्रपति मुर्मू ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस शुभ कार्य के लिए लंबे समय से सही समय का इंतजार किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जब वह झारखंड की सेवा में थीं, तभी से भगवान जगन्नाथ मंदिर के निर्माण की इस पहल का इंतजार था और आज वह समय आ गया है। उन्होंने इसे प्रभु की इच्छा बताया और कहा कि यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेगा।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि भगवान जगन्नाथ निराकार विहारी हैं, लेकिन अब वे झारखंड और जमशेदपुर से भी जुड़े रहेंगे। उनके समक्ष सभी समान हैं और यही भावना समाज में समरसता को बढ़ावा देती है।

सांस्कृतिक चेतना और विकास साथ-साथ
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि उन्हें ओडिशा में पांच वर्षों तक रहने का अवसर मिला, जिससे भगवान जगन्नाथ की परंपरा और संस्कृति को समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर लोहानगरी के साथ-साथ आदर्शनगरी के रूप में भी जाना जाता है और यहां का सामाजिक सौहार्द देश के लिए उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब वह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
आध्यात्मिक केंद्र से समाज को दिशा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज एक ऐसे सामाजिक और आध्यात्मिक केंद्र की नींव रखी गई है, जो समाज को नई दिशा देगा। उन्होंने इसे झारखंड और जमशेदपुर के लिए सौभाग्य की बात बताया।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भगवान जगन्नाथ का नया मंदिर जमशेदपुर के सांस्कृतिक जीवन में नया अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने बताया कि देशभर में 500 से अधिक मंदिर भक्तों द्वारा बनाए जा चुके हैं और ऐसे केंद्र समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
कोल्हान की एकता का प्रतीक
राष्ट्रपति ने कहा कि कोल्हान क्षेत्र सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है, जहां सभी समुदाय मिल-जुलकर रहते हैं। मंदिर निर्माण इस एकता को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में जनजातीय समुदाय की बड़ी आबादी है और उन्हें भी भगवान जगन्नाथ को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।
आदिवासी परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों की पूजा प्रकृति के सम्मान का संदेश देती है। “हम भिन्न नहीं, अभिन्न हैं। भगवान जगन्नाथ जग के नाथ हैं और वे सभी के हैं,” उन्होंने कहा।
युवा पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरूकता जरूरी
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक विकास भी जरूरी है। उन्होंने बालिका छात्रावासों को प्राथमिकता देने और युवाओं को सही दिशा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गीता में आत्मा के पोषण का उल्लेख है और इसका अध्ययन हर व्यक्ति को करना चाहिए, जिससे जीवन में संतुलन और सकारात्मकता आए।
कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण को आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया।







