Chaibasa (चाईबासा) : वायरल हो रहा वीडियो सिर्फ गंदगी का दृश्य नहीं, बल्कि पूरे नगर तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। सड़कों पर पसरी गंदगी, उफनती नालियां और जिम्मेदारों की चुप्पी यह साफ संकेत दे रही है कि व्यवस्था कहीं न कहीं पूरी तरह चरमरा चुकी है।

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“सेवक या मालिक?” – अफसरशाही पर उठते सवाल
नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि अधिकारी खुद को जनता का सेवक नहीं, बल्कि मालिक समझ बैठे हैं।
कागजों में नियम-कानून मजबूत दिखते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई वायरल वीडियो में खुलकर सामने आ रही है।

नया बोर्ड भी कठघरे में
हाल ही में चुना गया नया बोर्ड भी अब सवालों के घेरे में है।
जनता ने जिन प्रतिनिधियों पर भरोसा जताया, वे या तो स्थिति से अनजान हैं या फिर जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं।
👉 क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव जीतने तक ही सीमित रह गई है?
👉 क्या जनता की समस्याएं अब प्राथमिकता में नहीं रहीं?
कानून का उल्लंघन?
नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत साफ-सफाई, जल निकासी और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। लेकिन मौजूदा हालात इस कानून की अनदेखी की ओर इशारा करते हैं।
आने वाले दिनों में खतरा बढ़ेगा
अगर अभी भी हालात नहीं सुधरे, तो त्योहारों, जुलूसों और रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों को और गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
यह मुद्दा सिर्फ गंदगी का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है।
अब क्या होना चाहिए?
- बेलगाम अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
- नए बोर्ड को जमीन पर सक्रिय होना होगा
- जनता को भी सवाल पूछने के लिए आगे आना होगा
बड़ा सवाल
👉 क्या चाईबासा नगर परिषद अब जागेगा?
👉 या फिर ऐसे वीडियो ही व्यवस्था की हकीकत बताते रहेंगे?
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