चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम): झारखंड के चाईबासा नगर परिषद एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। यहां कार्यरत कई कर्मियों से वर्षों से न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन पर काम कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर जांच और न्यायोचित कार्रवाई की मांग की गई है।
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शिकायतकर्ता पूर्व वार्ड पार्षद विप्लव कुमार ने उपायुक्त को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि नगर परिषद में कार्यरत कई दैनिक, संविदा और अस्थायी कर्मियों से पिछले 5 वर्षों या उससे अधिक समय से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यह स्थिति न केवल न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 का उल्लंघन है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 के तहत श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का भी हनन है।
स्थायी काम, लेकिन अस्थायी दर्जा
शिकायत में बताया गया है कि कर्मियों से नियमित और स्थायी प्रकृति का कार्य लिया जा रहा है, बावजूद इसके उन्हें संविदा या मानदेय के नाम पर कम वेतन देकर वर्षों से शोषित किया जा रहा है। इससे नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन से की गई ये प्रमुख मांगें:
नगर परिषद के सभी कर्मियों के वेतन भुगतान की जांच के लिए विशेष समिति का गठन
न्यूनतम मजदूरी के उल्लंघन के दोषियों पर कार्रवाई
प्रभावित कर्मियों को बकाया एरियर सहित पूरा भुगतान
श्रम अधीक्षक द्वारा संयुक्त निरीक्षण और रिपोर्ट
भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए सख्त निर्देश
शिकायतकर्ता ने कहा है कि वर्षों से कम मजदूरी पर काम करना श्रमिकों की मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है और प्रशासन से उम्मीद है कि इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई कर श्रमिकों को न्याय दिलाया जाएगा।
अब बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाएगा या फिर मजदूरों की आवाज यूं ही दबती रहेगी?
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