पेंशन 16 महीने की देरी पर बैंक जिम्मेदार: उपभोक्ता आयोग ने ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश

पारिवारिक पेंशन

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम): पश्चिम सिंहभूम की एक आदिवासी महिला को पारिवारिक पेंशन मिलने में 16 महीने की देरी के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए ₹1,00,000 मुआवजा और ₹15,000 वाद व्यय देने का निर्देश दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता सल्बन्ती बोदरा ने 30 जून 2022 को पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया था।
रेलवे विभाग ने 23 अगस्त 2023 को बैंक से आवश्यक लास्ट पेमेंट सर्टिफिकेट (LPC) मांगा, लेकिन बैंक ने 17 अक्टूबर 2023 को अधूरी जानकारी भेजी।
इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी—
10 जून 2024
29 नवंबर 2024
को रेलवे द्वारा दो बार स्मरण पत्र भेजे गए, लेकिन बैंक समय पर सही जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका।

16 महीने की देरी, 2025 में मिला पेंशन

शिकायतकर्ता को अंततः 28 फरवरी 2025 को पेंशन प्राप्त हुई, जबकि यह अक्टूबर 2023 में मिल जानी चाहिए थी।
इस तरह करीब 16 महीने की देरी हुई, जिससे महिला को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मामले को लेकर उन्हें केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक जाना पड़ा।

आयोग की सख्त टिप्पणी

जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा:
👉 “पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि व्यक्ति का अधिकार है।”
आयोग ने माना कि बैंक, जो पेंशन वितरण एजेंसी है, उसकी जिम्मेदारी है कि समय पर और सही जानकारी उपलब्ध कराए।
इस मामले में बैंक की लापरवाही को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना गया।

बैंक की दलील खारिज

बैंक ने यह तर्क दिया कि सीपीपीसी नागपुर जिम्मेदार नहीं है, लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि बैंक की सभी इकाइयाँ एक ही प्रणाली का हिस्सा हैं और सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं।

45 दिनों में भुगतान का आदेश

आयोग ने आदेश दिया कि बैंक 45 दिनों के भीतर:
₹1,00,000 मुआवजा
₹15,000 वाद व्यय
का भुगतान करे।
यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो राशि पर 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

बड़ा संदेश

यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकारी या बैंकिंग लापरवाही से आम नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा में देरी को गंभीर अपराध माना जाएगा।

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