सारंडा: सारंडा जंगल हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों को सिर्फ दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि प्रकृति की कठिन चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है। पश्चिम सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के कोबरा बटालियन के जवान राकेश कुमार की दर्दनाक मौत हो गई।
सारंडा IED विस्फोट: सर्च ऑपरेशन के दौरान कोबरा जवान घायल, इलाके में हाई अलर्ट
बताया जा रहा है कि अभियान के दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी-तूफान शुरू हो गया। इसी बीच एक विशाल पेड़ जवान राकेश कुमार के ऊपर गिर पड़ा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद अन्य जवानों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और उन्हें सुरक्षित निकालकर एयरलिफ्ट के जरिए रांची भेजा गया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
गंभीर रूप से घायल राकेश कुमार को बेहतर इलाज के लिए रांची लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन को गहरे शोक में डाल दिया है।
गांव में पसरा मातम
शहीद राकेश कुमार बिहार के Aurangabad district के दाउदनगर प्रखंड के धमनी गांव के निवासी थे। उनके शहीद होने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों ने भी अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
रांची स्थित सीआरपीएफ कैंप में शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव भेजा जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
खतरनाक परिस्थितियों में ड्यूटी निभाते जवान
सारंडा जंगल हादसा यह दर्शाता है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। घने जंगल, खराब मौसम और दुर्गम रास्ते सुरक्षा बलों के लिए हमेशा जोखिम भरे होते हैं। इसके बावजूद जवान पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हैं।
निष्कर्ष
सारंडा जंगल हादसा देश के उन अनगिनत वीर जवानों की याद दिलाता है, जो हर परिस्थिति में देश की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। राकेश कुमार का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा और उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।








