चाईबासा नो एंट्री आंदोलन ने अब एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है, जब आंदोलन समिति के प्रतिनिधियों ने संतोष कुमार गंगवार से रांची स्थित लोकभवन में मुलाकात की। इस बैठक में समिति ने चाईबासा क्षेत्र में नो एंट्री व्यवस्था लागू करने और ग्रामीणों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग प्रमुखता से उठाई।
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन पर राज्यपाल की त्वरित कार्रवाई
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल ने तत्काल जिला प्रशासन से संपर्क किया। उन्होंने चंदन कुमार (उपायुक्त) से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। साथ ही दीपक बिरुआ से भी संपर्क करने का प्रयास किया।
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री स्तर पर उठाकर जल्द समाधान की दिशा में पहल करेंगे। इस सकारात्मक रुख से आंदोलनकारियों में उम्मीद जगी है।
क्या है चाईबासा नो एंट्री आंदोलन का पूरा मामला
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन की शुरुआत 27 सितंबर 2025 को हुई थी, जब कोल्हान क्षेत्र के हजारों ग्रामीण एमडीआर-177 बाईपास पर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए “नो एंट्री” लागू करने की मांग को लेकर एकत्र हुए थे। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच झड़प हुई।
इसके बाद पुलिस ने 73 नामजद और 500 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जबकि 16 लोगों को जेल भेजा गया। यही घटना आंदोलन का मुख्य आधार बनी हुई है।
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन की प्रमुख मांगें
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन के तहत समिति ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- लाठीचार्ज मामले (155/2025, 171/2025) के सभी मुकदमे वापस लिए जाएं
- MDR-177, AH-75E और NH-220 पर नो एंट्री नियम लागू हो
- घायल ग्रामीणों को उचित मुआवजा और इलाज मिले
- घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो
- भविष्य में जनसमस्याओं के समाधान के लिए स्थायी तंत्र बने
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन: न्याय यात्रा का ऐलान
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए समिति ने 26 अप्रैल से 1 मई तक चाईबासा से रांची तक पैदल न्याय यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। इस यात्रा में सैकड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है।
समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने बताया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य
राज्यपाल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में रमेश बालमुचू, महेंद्र जामुदा, रवि बिरुली, रेयांस सामड, साधु बानरा, उषारानी सवैयां और सुमी लागूरी शामिल थे।
निष्कर्ष
चाईबासा नो एंट्री आंदोलन अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप के संकेत भी मिलने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्याय यात्रा और सरकारी कदम इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे।
http://नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची: 26 अप्रैल से शुरू होगा बड़ा जनआंदोलन








