बायोमैट्रिक अटेंडेंस मामले की सुनवाई अब CGIT धनबाद में, अगली तारीख पर दोनों पक्ष देंगे साक्ष्य

बायोमेट्रिक

Chaibasa (चाईबासा) : किरीबुरू खदान में लागू किए गए बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को लेकर चल रहा विवाद अब केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT) धनबाद में पहुंच गया है। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू द्वारा दायर मामले की सुनवाई 14 मई को सम्पन्न हुई, जिसमें प्रबंधन और यूनियन दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखीं।

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सुनवाई के दौरान सेल प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता बी. डी. वर्मा ने पक्ष रखा, जबकि यूनियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सोमेन्द्र नाथ घोष उपस्थित रहे। उनके साथ यूनियन के महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया, संयुक्त महामंत्री सुनील कुमार पासवान, संगठन सचिव संजय तिग्गा, कार्यालय सचिव प्रभा सिद्धू और कोषाध्यक्ष लखन चाम्पिया भी मौजूद रहे।

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यूनियन ने अपने लिखित प्रतिउत्तर में एनजेसीएस कमेटी और सेल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि एनजेसीएस कोई पंजीकृत फोरम नहीं है और उसे स्टैंडिंग ऑर्डर में संशोधन करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। यूनियन के अनुसार औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम के तहत किसी भी स्टैंडिंग ऑर्डर में बदलाव केवल त्रिपक्षीय फोरम — जिसमें प्रबंधन, सरकार और मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठन शामिल हों — के माध्यम से ही संभव है।

संगठन ने यह भी दावा किया कि किरीबुरू खदान में फिलहाल कोई मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन नहीं है। यूनियन के मुताबिक सेल प्रबंधन ने पूर्व में एएलसी कोर्ट में दिए गए अपने लिखित बयान में भी इस तथ्य को स्वीकार किया था।

सुनवाई के दौरान प्रबंधन पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का विरोध करना ड्यूटी से बचने की मानसिकता को दर्शाता है। इस पर यूनियन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वास्तविक मुद्दा श्रम कानूनों को कमजोर करने और श्रमिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास है।

यूनियन ने अदालत को बताया कि उसे बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित श्रम कानूनों के तहत लागू किया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि स्टैंडिंग ऑर्डर श्रमिकों को शोषण और अन्याय से बचाने का महत्वपूर्ण कानूनी माध्यम है।

अब मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिसके बाद अंतिम बहस की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। श्रमिक संगठनों और प्रबंधन के बीच चल रहा यह विवाद क्षेत्र के औद्योगिक माहौल में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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