बीमा दावा लंबित रखना SBI Life को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने 15 दिन में प्रक्रिया शुरू करने का दिया आदेश

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चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद नामित व्यक्ति के मृत्यु बीमा दावे को लंबित रखने के मामले में SBI Life Insurance Company Ltd. को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कंपनी को दावा प्रक्रिया आगे बढ़ाने और नियमानुसार वास्तविक देय राशि का निर्धारण कर भुगतान करने का आदेश दिया है।

मामला सी.सी. केस संख्या 10/2025 से संबंधित है। मामले की संस्थापन तिथि 19 मार्च 2025, अंतिम सुनवाई 30 जुलाई 2026 और फैसले की घोषणा 22 अगस्त 2026 को हुई।

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1.30 लाख रुपये की बीमित राशि का मामला

शिकायतकर्ता राजेश मिंज, मेरी टोला, वार्ड नंबर-02, चाईबासा निवासी हैं। उनके अनुसार उनकी मामी धानिया तिर्की ने SBI Life की Smart Money Back Gold Policy ली थी। पॉलिसी संख्या IN620373604 में राजेश मिंज को 100 प्रतिशत नामित व्यक्ति बताया गया है। पॉलिसी की जोखिम अवधि 16 मई 2017 से शुरू हुई थी और बीमित राशि 1.30 लाख रुपये थी।

धानिया तिर्की की मृत्यु 26 जनवरी 2024 को हो गई। इसके बाद नामित व्यक्ति की ओर से मृत्यु बीमा राशि के लिए दावा किया गया, लेकिन कंपनी की ओर से दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसी को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की गई।

SBI Life ने क्या दलील दी?

बीमा कंपनी की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि उसे मृत्यु की विधिवत सूचना और दावा निर्धारित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए थे। कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि नामित व्यक्ति को पॉलिसी नंबर, मृत्यु की तारीख और मृत्यु का कारण बताते हुए लिखित सूचना देनी थी।

कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण दावा निर्धारित नहीं किया जा सकता था और उपभोक्ता शिकायत समय से पहले दाखिल की गई।

आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने पाया कि मृत्यु प्रमाणपत्र, पॉलिसी दस्तावेज समेत आवश्यक कागजात बाद में आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए और शिकायत के साथ दस्तावेजों की प्रतियां बीमा कंपनी को भी उपलब्ध हो चुकी थीं। ऐसे में केवल इस आधार पर दावे को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं माना गया कि शिकायत दाखिल करने से पहले अलग से दावा सूचना नहीं दी गई थी।

आयोग ने कहा कि यदि किसी दस्तावेज की कमी है तो कंपनी को शिकायतकर्ता को आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट और पूरी सूची उपलब्ध करानी चाहिए।

15 दिन में बतानी होगी दस्तावेजों की कमी

आयोग ने SBI Life को आदेश दिया है कि आदेश प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को मृत्यु दावा निपटाने के लिए आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेजों की पूरी सूची लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए।

इसके बाद शिकायतकर्ता द्वारा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने पर कंपनी को 30 दिनों के भीतर दावे की जांच पूरी कर कारणयुक्त निर्णय देना होगा। यदि दावा स्वीकार किया जाता है तो पॉलिसी की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार पात्र व्यक्ति को वास्तविक देय राशि का भुगतान करना होगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 1.30 लाख रुपये की बीमित राशि को स्वतः अंतिम मृत्यु लाभ नहीं माना जाएगा। वास्तविक भुगतान पॉलिसी की स्थिति, लागू बोनस और अन्य संविदात्मक प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होगा।

मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार और मुकदमा खर्च के 5 हजार

आयोग ने शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च के रूप में 5,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है। यह राशि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर देनी होगी।

निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर संबंधित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।

आयोग के इस आदेश से स्पष्ट है कि बीमा दावों में दस्तावेजी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होने के बावजूद किसी दावे को केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधार पर अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। कंपनी को आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा तय करना होगा।

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