*चाईबासा/मनोहरपुर:* पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र में अवैध बालू के परिवहन और पुलिस की कथित भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ढीपा पंचायत क्षेत्र में अवैध बालू लदे दो ट्रैक्टरों को पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर रात में ही छोड़ दिए जाने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि दोनों ट्रैक्टरों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के मुक्त कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस और बालू कारोबारियों के बीच कथित सांठगांठ को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
## थाना प्रभारी की मौजूदगी में लेनदेन का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों और कथित प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने ढीपा पंचायत क्षेत्र में अवैध बालू लदे दो ट्रैक्टरों को पकड़ा था। आरोप है कि मौके पर मनोहरपुर थाना प्रभारी भी मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि इसी दौरान कथित तौर पर पैसों का लेनदेन हुआ, जिसके बाद दोनों ट्रैक्टरों और उनके चालकों को रात के अंधेरे में ही छोड़ दिया गया।
हालांकि, कथित लेनदेन की राशि, घटना के समय और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है।

## ट्रैक्टर मालिकों और चालकों के नाम आए सामने
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रैक्टरों के मालिकों के रूप में चिरिया निवासी रोशन कंडूलना और मनोज समद के नाम बताए जा रहे हैं। वहीं, ट्रैक्टर चालकों की पहचान विजेंद्र चांपिया और बाबूलाल सुरीन के रूप में बताई गई है।
इन लोगों की भूमिका, ट्रैक्टरों पर लदी बालू के स्रोत और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेजों की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
## अवैध बालू कारोबार पर कार्रवाई की मांग
घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी की बात कही जा रही है। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि ट्रैक्टर अवैध बालू के परिवहन में पकड़े गए थे, तो उन्हें किस आधार पर छोड़ा गया। लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब इस मामले में जिला पुलिस प्रशासन और संबंधित खनन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए कथित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और ट्रैक्टरों को छोड़े जाने से संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी है। फिलहाल, मामले में आधिकारिक पुष्टि और पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







