आदित्यपुर,: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की पहल पर सोमवार को आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर सभागार में ‘ग्रीन ऑडिट’ विषय पर एक दिवसीय विशेष सुविधा कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की ऑटो कंपोनेंट इकाइयों को पर्यावरण अनुकूल तकनीकों और संसाधनों के कुशल उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

अनिवार्य हुआ ग्रीन ऑडिट: विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
कार्यशाला में कोलकाता से आए मुख्य ग्रीन ऑडिटर डॉ. चंदन तिवारी ने स्पष्ट किया कि MSME मंत्रालय के नवीनतम निर्देशों के अनुसार, ऑटो घटकों से संबंधित सभी उद्योगों के लिए ‘ग्रीन ऑडिट’ कराना अब अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि पूर्व में आयोजित दो सम्मेलनों के बाद अब उद्योगों को इसे धरातल पर उतारने के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं।
संसाधनों की बचत से घटेगी परिचालन लागत
जियाडा (JIADA) के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन ने उद्योगों को होने वाले आर्थिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रीन ऑडिट के माध्यम से बिजली और पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की खपत का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा। ऑडिटिंग एजेंसियां उद्यमियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर सुझाव देंगी:
* बिजली की खपत को न्यूनतम करने के तकनीकी उपाय।
* कम ऊर्जा खपत में मशीनों का बेहतर और कुशल संचालन।
* अपव्यय रोककर कुल उत्पादन लागत में कमी लाना।
दिनेश रंजन ने भरोसा जताया कि इन सुधारात्मक उपायों को अपनाकर उद्यमी अपनी परिचालन लागत में बड़ी गिरावट देख पाएंगे, जो वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों और उद्यमियों की उपस्थिति
कार्यशाला में जियाडा रांची के अधिकारी निशित रंजन, कोलकाता से रामु कुमार सिंह, एसिया (ASIA) अध्यक्ष इंदर अग्रवाल, इसरो (ISRO) अध्यक्ष रूपेश कटारिया, प्रवीण गुड़गुटिया, दशरथ, उपाध्यक्ष संदीप मिश्रा और मनोज कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय उद्यमी उपस्थित थे। विशेषज्ञों ने सत्र के अंत में उद्यमियों की तकनीकी शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया।








