आयुष्मान आरोग्य मंदिर टेंडर में अनियमितता के आरोप, सात दिन में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश

चाईबासा में आयुष्मान आरोग्य मंदिर टेंडर की जांच

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग, रंग-रोगन, पीट निर्माण और अन्य कार्यों के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वित्त सह प्रभारी पदाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सिविल सर्जन को सात दिनों के भीतर बिंदुवार जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मामला टेंडर आईडी 2025-HLTH-108300-1 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एआई शिहानं प्राइवेट लिमिटेड की ओर से निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने में देरी, निविदा शर्तों के संभावित उल्लंघन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी सहित कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

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दो संवेदकों को कार्य आवंटन पर उठे सवाल

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में सफल रहे कई फर्मों को कार्य आवंटन की जानकारी नहीं दी गई, जबकि दो संवेदकों के बीच बड़े पैमाने पर कार्य बांट दिया गया। शिकायत के अनुसार पलामू की राहुल इंटरप्राइजेज और चाईबासा के नीरज कुमार को कार्य आवंटित किया गया।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि टेंडर में शामिल अन्य 12 सफल फर्मों को कार्य आवंटन की प्रक्रिया से अवगत नहीं कराया गया। साथ ही उनके द्वारा जमा की गई अग्रिम राशि वापस नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

सिविल सर्जन ने कार्य पर लगाई रोक

मामला सामने आने के बाद पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने आवंटित कार्यों पर रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने प्रथम दृष्टया प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए जांच शुरू किए जाने की जानकारी दी है।

सिविल सर्जन के अनुसार, जांच के बाद जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

पदभार ग्रहण के दिन जारी हुआ था वर्क ऑर्डर

शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी के पदभार ग्रहण करने वाले दिन, 26 मार्च, दोनों फर्मों को कार्य आवंटित किए गए। इस संबंध में सिविल सर्जन ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

इससे विभागीय स्तर पर कार्य आवंटन की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी ऑनलाइन पोर्टल पर आवश्यक जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई। इसे लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक सह वित्त प्रभारी पदाधिकारी ने पूरे मामले की बिंदुवार जांच का निर्देश दिया है।

वहीं, सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर आवंटित कार्य जारी रहने और कई जगह काम पूरा होने की भी बात सामने आ रही है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रोक के आदेश के बावजूद कहीं कार्य जारी तो नहीं रहा।

जांच रिपोर्ट से साफ होगी पूरी स्थिति

फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से सिविल सर्जन को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि अनियमितता हुई है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

नोट: खबर में लगाए गए आरोप शिकायत और जांच के आदेश पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।

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