चांडिल:सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध बालू खनन और परिवहन पर जिला प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग द्वारा लगातार सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है। आरोप है कि पूरे चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में बालू माफियाओं का नेटवर्क एक बार फिर बेखौफ होकर सक्रिय हो चुका है।
बताया जा रहा है कि एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद देर रात से लेकर सुबह तक स्वर्णरेखा नदी के जारगोड़ी, सोड़ो और वीरडीह क्षेत्र से अवैध रूप से बालू का उठाव किया जा रहा है। इसके बाद भारी वाहनों के जरिए खुलेआम परिवहन का सिलसिला जारी रहता है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के दावे करते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल रात करीब 1 बजे से सुबह 6 बजे तक चलता है। आरोप यह भी है कि अवैध बालू से लदे वाहनों की बाकायदा एंट्री की जाती है और प्रत्येक वाहन से ₹6,000 की अवैध वसूली की जाती है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 5999 नंबर श्रृंखला के तीन से चार वाहन हर रात जारगोड़ी से मिलन चौक तक कथित रूप से इन ट्रकों को एस्कॉर्ट करते देखे जाते हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे नेटवर्क में पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारियों तथा आदित्यपुर निवासी विवेक झा उर्फ छोटू झा की भूमिका की चर्चा क्षेत्र में लगातार होती रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
गौरतलब है कि इससे पहले जेएलकेएम के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो ने भी अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ आवाज उठाई थी। उस समय पूरे मामले ने तूल पकड़ा था, विवाद हुआ, मारपीट की घटना सामने आई और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बाद में तत्कालीन थाना प्रभारी को लाइन क्लोज किया गया तथा सोड़ो में मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई थी. फिर ताजा घटना आदित्यपुर के हिमांशु हत्याकांड से जुड़ा है. पुलिस वाहन से निकालकर अपराधियों ने जिस तरह से हिमांशु और प्रत्युष को बेरहमी से मारा, उसके खिलाफ जिला प्रशासन के प्रति लोगों में रोष बढ़ गया. इस मामले को शांत कराने में पुलिस-प्रशासन के पसीने छूट गए थे. फिर-मामला किसी तरह शांत हुआ.
लेकिन अब स्थानीय लोगों का दावा है कि इन मामलों के शांत पड़ते ही अवैध बालू का कारोबार फिर उसी रफ्तार से शुरू हो गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या एनजीटी का प्रतिबंध केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है? क्या बालू माफियाओं के आगे प्रशासनिक कार्रवाई बेअसर साबित हो रही है? और यदि आरोप सही हैं, तो आखिर किसके संरक्षण में यह कथित खेल रात-दर-रात जारी है?
http://गौरी घाट अवैध बालू खनन पर सख्त कार्रवाई: बालू लदा ट्रैक्टर जब्त, माफियाओं में हड़कंप








