चाईबासा: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, चाईबासा ने सी.सी. केस संख्या 37/2024 में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने बीमा दावा खारिज करने को अवैध और अनुचित ठहराते हुए परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने बीमा कंपनी को कुल ₹1,00,000 का भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसमें ₹70,000 दावा राशि, ₹20,000 मानसिक प्रताड़ना के लिए और ₹10,000 वाद व्यय शामिल है।
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क्या है मामला
मामले के अनुसार, चाईबासा के रानी कॉलोनी निवासी बसंत कुमार ने अपने हाइवा वाहन (JH05AY6141) का बीमा इफकोटोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। 19 फरवरी 2024 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद उन्होंने बीमा दावा प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने क्यों किया इनकार
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा अस्वीकार कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन ओवरलोड था, जो बीमा शर्तों का उल्लंघन है।
आयोग ने क्या पाया
आयोग के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और दो चालानों (संख्या 14021 एवं 14024) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के समय वाहन दूसरे ट्रिप में था और निर्धारित सीमा के भीतर लोडेड था।
आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने गलत तथ्यों के आधार पर दावा खारिज किया, जो
- सेवा में कमी (Deficiency in Service)
- अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice)
की श्रेणी में आता है।
देरी को आधार बनाकर दावा खारिज करना गलत
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सूचना देने में देरी को आधार बनाकर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता, जब तक कंपनी यह साबित न करे कि इससे उसे वास्तविक नुकसान हुआ है।
45 दिनों में भुगतान का आदेश
आयोग ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिनों के भीतर ₹1 लाख का भुगतान करे। तय समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि बीमा कंपनियों को दावों के निपटान में पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतनी होगी।







