नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची को लेकर पश्चिमी सिंहभूम जिले में जनआंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। चाईबासा बाइपास सड़क (डोबरोसाई—गितिलपी रोड) और एनएच-75(ई) पर दिन के समय भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर 26 अप्रैल से न्याययात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा 1 मई को रांची पहुंचेगी, जहां राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची की पृष्ठभूमि
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची की पृष्ठभूमि सड़क सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जुड़ी है। चाईबासा बाइपास सड़क पर भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर महीने औसतन 4-5 दुर्घटनाएं इस मार्ग पर हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है।
इस सड़क से रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक गुजरते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

गांव-गांव में तेज हुआ जनसंपर्क अभियान
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची को सफल बनाने के लिए आंदोलन समिति द्वारा गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। सिंहपोखरिया गांव में आयोजित बैठक में समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने ग्रामीणों से न्याययात्रा में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा सवाल है। इसलिए हर वर्ग—ग्रामीण, छात्र, सामाजिक संगठन—को इस आंदोलन में भाग लेना चाहिए।
शैक्षणिक संस्थानों से भी मांगा जा रहा समर्थन
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए आसपास के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों से भी संपर्क किया जा रहा है। समिति का कहना है कि इस सड़क पर सबसे ज्यादा खतरा छात्रों को है, जो रोजाना इसी मार्ग से यात्रा करते हैं।
तांबो, तुईवीर, सरजोमगुटू, हेसाबासा, गितिलपी, महुलसाई और टुंगरी जैसे क्षेत्रों के लोग भी भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची के तहत आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:
- चाईबासा बाइपास सड़क और एनएच-75(ई) पर दिन में पूर्ण नो एंट्री लागू की जाए
- एनएच-220 पर भी भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जाए
- सड़क दुर्घटनाओं में मृत और घायल लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए
- तांबो चौक आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लिया जाए
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
पहले भी हो चुका है बड़ा आंदोलन
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची से पहले भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन हो चुका है। 27 अक्टूबर 2025 को तांबो चौक पर सड़क जाम किया गया था, जिसके दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई थी।
इस मामले में 70 से अधिक नामजद और 700 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में लंबित है।
क्या होगा आगे?
नो एंट्री न्याययात्रा चाईबासा रांची अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। 26 अप्रैल से शुरू होकर 1 मई तक चलने वाली यह यात्रा सरकार के लिए एक बड़ा संदेश साबित हो सकती है।
यदि सरकार इस पर ध्यान देती है, तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। अन्यथा, यह आंदोलन आने वाले समय में और उग्र रूप ले सकता है।








