चाईबासा: टाटा बाईपास चौक पर प्रस्तावित पद्मश्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना को लेकर आदिवासी हो समाज युवा महासभा, पश्चिमी सिंहभूम जिला समिति ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि इस स्थान पर कोल्हान के किसी वीर शहीद, स्वतंत्रता सेनानी या स्थानीय ऐतिहासिक विभूति की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और बलिदानियों को उचित सम्मान मिल सके।
जिला अध्यक्ष शेर सिंह बिरुवा ने जारी बयान में स्पष्ट किया कि संगठन का विरोध किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता हैं और आदिवासी समाज उनके योगदान का सम्मान करता है। लेकिन टाटा बाईपास जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर कोल्हान की धरती से जुड़े वीर शहीदों और महापुरुषों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोल्हान का इतिहास वीरता और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा है। हो विद्रोह, कोल विद्रोह, सेरेंगसिया घाटी का युद्ध, खरसावां गोलीकांड और गुवा गोलीकांड जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों में अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर क्षेत्र की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा की। उन्होंने बिरसा मुंडा, पोटो हो, नारा हो, बोड़ो हो, बड़ई हो, बूगनी हो, पांडुवा हो, देवी हो, केरसे मुंडा तथा ईचा-खरकई परियोजना विरोध आंदोलन के शहीद गंगाराम कालुंडिया सहित कई स्थानीय विभूतियों का उल्लेख किया।
शेर सिंह बिरुवा ने यह भी कहा कि हो भाषा, लिपि और साहित्य के विकास में ओत गुरु कोल लाको बोदरा, कोल्हान के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले पूर्व सांसद बागुन संब्रुई, केसी हेंब्रोम, संविधान सभा सदस्य एवं पूर्व मंत्री पूर्ण चंद्र बिरुवा, स्वर्गीय सागू समाड और स्वर्गीय दलपत देवगम मानकी का योगदान भी अविस्मरणीय है।
महासभा ने झामुमो जिला समिति द्वारा प्रतिमा स्थापना के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर कोल्हान के वीर शहीदों और स्थानीय महापुरुषों की प्रतिमाएं एवं स्मारक स्थापित किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने क्षेत्र के इतिहास, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।








