चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में मंगलवार को जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण कार्यालय एवं संबंधित विभागों के समन्वय से संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एकीकृत बाल संरक्षण योजना, बाल कल्याण, बाल सुधार गृह, बाल तस्करी और बाल मजदूरी से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग खुशेन्द्र सोनकेशरी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी, श्रम अधीक्षक तथा विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बैठक के दौरान बताया गया कि जिले में संचालित पालन-पोषण देखभाल योजना के तहत जोखिम वाले तबके के बच्चों के सर्वांगीण विकास और बेहतर भविष्य के लिए फोस्टर केयर को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में 9 परिवारों ने फोस्टर केयर के तहत बच्चों के पालन-पोषण के लिए आवेदन दिया है।
समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की बिंदुवार समीक्षा की।
अधिकारियों ने बताया कि बाल देखरेख संस्थानों में छह माह से अधिक समय से रह रहे बच्चों को उनके परिवारों से संपर्क कर पुनर्वासित करने की प्रक्रिया जारी है। इस दिशा में बाल कल्याण समिति द्वारा फोस्टर केयर, आफ्टर केयर और एलएफए (कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र) श्रेणी के तहत कुल 24 बच्चों का चयन किया गया है। इनमें से 14 बच्चों का एलएफए निष्पादन पूरा हो चुका है, जबकि 10 बच्चों की प्रक्रिया जारी है।

बैठक में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले में जोखिम वाले तबके के अधिक से अधिक बच्चों को बेहतर देखभाल और संरक्षण से जोड़ने के लिए ग्रुप फोस्टर केयर मॉडल विकसित किया जाए। साथ ही एसओएस केंद्र और विशेष दत्तक केंद्र के संचालन के लिए अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई और इनके सफल व सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।








