चाईबासा/चक्रधरपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल द्वारा रनिंग स्टाफ के स्थानांतरण के लिए जारी नई ट्रांसफर नीति (JPO) के विरोध में कर्मचारियों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। जुरुली में आयोजित दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस (SERMC) की रनिंग शाखा की बैठक में 200 से अधिक रनिंग कर्मचारियों ने भाग लिया और नई नीति को कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि नई ट्रांसफर नीति के तहत ब्रांच लाइन में कार्यरत कर्मचारियों को दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद केवल चक्रधरपुर, सिनी, मूरी और झारसुगुड़ा लॉबी में स्थानांतरण का अवसर मिलेगा। इसके बाद भी इच्छित लॉबी में जाने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। इतना ही नहीं, इन लॉबियों में स्थानांतरण के बाद तीन वर्ष का अनिवार्य लॉकिंग पीरियड भी रखा गया है, जिससे कर्मचारियों की परेशानी और बढ़ जाएगी।

बैठक में मौजूद रनिंग कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था विशेष रूप से डीपीएस, जुरुली और अन्य ब्रांच लाइन में कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि पहले से ही सीमित संसाधनों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कार्य कर रहे कर्मचारियों पर यह नीति अतिरिक्त मानसिक और पारिवारिक दबाव डालेगी।
दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से पुरानी ट्रांसफर व्यवस्था के तहत पारदर्शी और समयबद्ध स्थानांतरण की मांग करते रहे हैं। नई नीति से कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा है और इससे रनिंग स्टाफ का मनोबल प्रभावित होगा।

दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के नेता एस. आर. मिश्रा ने कहा,
“रेल प्रशासन को रनिंग कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुरानी ट्रांसफर नीति को पुनः लागू करना चाहिए। नई व्यवस्था कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी परेशानियों को बढ़ाने वाली है। यदि इस नीति पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।”
बैठक में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से नई JPO को अस्वीकार करते हुए पुरानी ट्रांसफर एवं पोस्टिंग व्यवस्था बहाल करने की मांग की और रेल प्रशासन से इस मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।








