सरायकेला-खरसावां: जिले में कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सरायकेला-खरसावां द्वारा ‘संकुल अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण’ (Cluster Frontline Demonstration) कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान क्षेत्र के दर्जनों किसानों को उन्नत तकनीक से खेती करने का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ आवश्यक कृषि सामग्रियां भी प्रदान की गईं।
सरायकेला: देशव्यापी ICAR-CSR कॉन्क्लेव 2026 आयोजित: देश भर के 5 लाख किसानों ने दिया रियल टाइम फीडबैक

कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान सह वरिष्ठ वैज्ञानिक पंकज सेठ ने बताया कि वर्ष 2026-27 के कार्यक्रम के तहत कुल 125 एकड़ भूमि के लिए 125 चयनित किसानों को मूंगफली के उन्नत प्रभेद ‘K 1812’ के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को खाद के रूप में सल्फर, बीज उपचार के लिए फफूंदनाशी बाविस्टिन (Bavistin) और कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) भी मुहैया कराया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बलुई और टांड़ मिट्टी में बुवाई की विधि, उचित दूरी तथा कीट प्रबंधन के तरीके समझाए। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने उम्मीद जताई कि इस उन्नत तकनीक से प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल तक मूंगफली का उत्पादन प्राप्त होगा।
कार्यक्रम में पहुंचे स्थानीय किसान श्रीकांत महतो ने कहा कि इस वर्ष कम बारिश होने की संभावना के कारण धान की खेती में कठिनाई आ सकती है। ऐसे में कृषि विभाग द्वारा दिया गया यह प्रशिक्षण और बीज बेहद मददगार साबित होगा। उन्होंने बताया कि वे अपनी टांड़ (ऊपरी) भूमि में मूंगफली की बुवाई करेंगे, जिसके लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
वहीं गम्हरिया प्रखंड से आई महिला किसान रैनागी किसकु ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र से ‘K 1812’ प्रभेद की मूंगफली के बीज और दवाइयां मिली हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों द्वारा बुवाई की सही तकनीक और बलुई मिट्टी के उपयोग के बारे में दी गई जानकारी से वे इस बार बेहतर और अधिक फसल उत्पादन की उम्मीद कर रही हैं।








