गुवा (पश्चिमी सिंहभूम): सारंडा क्षेत्र में पिछले 14 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन और औद्योगिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गुवा, बड़ाजामदा, किरीबुरू और मेघाहातुबुरु समेत पूरे इलाके में सड़कों से लेकर खदानों तक पानी भर जाने से सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे अधिक असर सेल की गुवा लौह अयस्क खदान पर पड़ा है, जहां जलभराव के कारण खनन कार्य प्रभावित हो गया है।

खदान के जीरो प्वाइंट सहित कई हिस्सों में भारी मात्रा में पानी जमा होने से खनन कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। जलभराव के कारण 15 नंबर शॉवेल मशीन, डोजर, कैंपर वाहन समेत कई भारी उपकरण पानी और मलबे में फंस गए हैं। खदान के भीतर स्थित शेल्टर हाउस, स्टोर और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों में भी पानी घुस गया है। कई भारी वाहनों का आधा हिस्सा पानी में डूबा होने से करोड़ों रुपये की मशीनरी को नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

इस बीच झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे ने सेल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन का पूरा ध्यान केवल उत्पादन लक्ष्य हासिल करने पर रहता है, जबकि श्रमिकों की सुरक्षा और खदान में जल निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।

रामा पाण्डे ने कहा कि यदि वैज्ञानिक माइनिंग प्लान के अनुरूप मजबूत बेंच, प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम और आपदा प्रबंधन की पूर्व तैयारी की गई होती तो आज खदान की यह स्थिति नहीं होती। उन्होंने कहा कि सारंडा क्षेत्र में हर वर्ष भारी वर्षा होती है, इसके बावजूद स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब खदान और श्रमिकों दोनों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समस्या केवल खदान तक सीमित नहीं है। गुवा क्षेत्र में सेल कर्मियों और सप्लाई मजदूरों के सरकारी क्वार्टर भी जर्जर हो चुके हैं। अधिकांश मकानों की छतों से बारिश का पानी टपक रहा है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार हो रही बारिश के कारण पूरे सारंडा क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित है। लोग हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि खदान प्रबंधन के सामने जलभराव से उत्पादन को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।








