महंगाई की चौका देने वाली मार: 10 दिनों में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जनता बेहाल

Ranchi (रांची) : देश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने आज (25 मई 2026) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी कर दी है। पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है।

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इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में पेट्रोल का दाम 100 रुपये के पार पहुंच गया है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा बोझ पड़ा है।

 

10 दिनों में ₹7.5 तक महंगा हुआ तेल

तेल कंपनियों द्वारा आज की गई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल के दामों में औसतन 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि करीब दो साल के लंबे फ्रीज (स्थिरता) के बाद इसी महीने 15 मई से कीमतों में संशोधन दोबारा शुरू हुआ था। इन 4 किस्तों को मिलाकर अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

प्रमुख महानगरों और झारखंड में आज के भाव (रुपये प्रति लीटर):
| शहर/राज्य | पेट्रोल की कीमत | डीजल की कीमत |
|    दिल्ली     |    ₹102.12        | ₹95.20 |
|    मुंबई       |    ₹111.21         | ₹97.83 |
| कोलकाता |    ₹113.51        | ₹99.82 |
| झारखंड    |    ₹105.26       | ₹99.90 |

 

आम जनता और व्यापारियों में भारी आक्रोश

लगातार बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ता, नौकरीपेशा वर्ग और खास तौर पर मध्यम वर्ग बेहद परेशान है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ कमाई नहीं बढ़ रही, वहीं दूसरी तरफ गाड़ी में तेल डलवाना अब बजट से बाहर होता जा रहा है।

ट्रांसपोर्टर्स और व्यापारियों ने भी इस पर चिंता जताई है। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (Transportation Cost) महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में हरी सब्जियों, दूध, राशन और अन्य जरूरी घरेलू सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही सिलसिला रहा, तो बाजार में चौतरफा महंगाई आना तय है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

बाजार सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (प्रमुख समुद्री तेल मार्ग) में आपूर्ति बाधित होने की वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर देश के खुदरा दामों पर दिख रहा है।

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